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परवल की खेती करे इस वैज्ञानिक विधि से खेती कमाएं मुनाफा

परवल की खेती पूरे वर्ष की जाती है, परवल की खेती ज्यादा पूर्वी उत्तर, बिहार, पश्चिम बंगाल में की जाती है। परवल बहुत पौष्टिक, स्वास्थ्य वर्धक एंव औषधीय गुण से भरपूर सब्जी है।

परबल विटामिन, कार्बोहाइडे्रट तथा प्रोटीन से भरपूर होता है, यदि किसान परवल की खेती वैज्ञानिक तकनीक से करें, तो इसकी फसल से अच्छी उपज के साथ अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते है।


बुआई का समय

खरीफ में

बुआई का समय- 1 अगस्त से 31 अगस्त के बीच

फसल अवधि- 300 से 600 दिन

रबी में

बुआई का समय- 1 नवंबर से 30 नवंबर के बीच

फसल अवधि- 300 से 600 दिन


तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई

परवल की फसल के लिए बलुई दोमट मिट्टी या दोमट मिट्टी वाली भूमि का चयन करना चाहिए। जिस खेत का चयन करे उसमें जल निकास की उचित व्यवस्था हो। फसल के लिए चयन की गई भूमि का पी.एच मान 6 से 7 के बीच का होना चाहिए।

परवल की रोपाई करने के 10 से 15 दिन पहले खेत की 1 जुताई के बाद 1 एकड़ खेत में 10 टन गोबर की खाद और 10 किलोग्राम कार्बोफुरान का इस्तेमाल करे। इसके बाद खेत की 3 बार अच्छे से जुताई करके पट्टा फेर दे।


परवल की उन्नत किस्में ( Varieties )

स्वर्ण अलौकिक- अवधि 300 से 600 दिन इस किस्म के फल अंडाकार होते हैं। इसका छिलका धूसर हरे रंग का होता है । परन्तु धारियां बिल्कुल नहीं होती है। फल मध्यम आकार के एंव 5 से 8 सेंटीमीटर लम्बे होते है। फलों में बीज बहुत कम और गूदा ज्यादा होता है।

स्वर्ण रेखा- अवधि 300 से 600 दिन इसके फलों पर सफेद धारियाँ होती है। फल की लम्बाई 8 से 10 सेंटीमीटर तथा औसत वनज 30 से 35 ग्राम होता है। फल गूदेदार तथा बीज बहुत मुलायम होता है । इस प्रजाति की सबसे बड़ी खासियत प्रत्येक गाठों पर फल का लगना है। औसत उपज 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

HP3- अवधि 300 से 600 दिन इसके फल 6 से 8 सेंटीमीटर लम्बे मोटे , हरे और सफ़ेद धारीदार होने में इनका गुदा कुछ पीलापन लिए होता है । फल का वजन 20 से 30 ग्राम होता है।

DVRPG105- अवधि 300 से 600 दिन इस प्रजाति के फलों में बीज नहीं बनता है , और लगाते समय नर पौधों की आवश्यकता नहीं होती है। फल मध्यम आकार के एंव किनारे की तरफ हल्का धारीदार होता है। उपज 100 से 120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आस – पास होती है।


परवल की खेती मे बीज की मात्रा

परवल की 1 एकड़ फसल तैयार करने के लिए 60 से 90 सेमी लम्बाई की 3 से 4 हजार लताओं की जरूरत होती है, जिसमे में 7 से 10 गांठ होनी चाहिए । फसल में अच्छे पैदावार के लिए 10 मादा पौधे के बीच 1 नर पौधा होना चाहिए ।

बीज उपचार

परवल की कलमों को 3 ग्राम कार्बोनडाज़िम को 1 लीटर पानी में मिलाकर उसमे 15 से 20 मिनट तक लता को डुबोकर उपचारित करें ।

बुआई का तरीका

परवल की लताओं की पंक्ति से पंक्ति की दूरी 1.5 से 2 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी 2 मीटर रखे ।


परवल की खेती मे उर्वरक व खाद प्रबंधन

बुवाई के समय परवल की 1 एकड़ फसल तैयार करने के लिए 8 टन गोबर की खाद बुवाई से 1 हफ्ते पहले डाल दे। खेत तैयारी के समय 50 किलोग्राम डी ए पी , 50 किलोग्राम पोटाश , 20 किलोग्राम यूरिया , 8 किलोग्राम कार्बोफुरोन , का इस्तेमाल करे।

बुवाई के 35 से 40 दिन बाद फसल में मिटटी चढ़ाते समय 1 एकड़ खेत में 30 किलोग्राम यूरिया , 5 किलोग्राम जायम का इस्तेमाल करे।

बुवाई के 50 से 55 दिन बाद फसल में फल फूल बनते समय 1 एकड़ खेत में 1 किलोग्राम NPK 0:52:34 को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करे।

बुवाई के 60 से 70 दिन बाद फसल में अच्छी ग्रोथ के लिए 1 एकड़ खेत में 30 किलोग्राम यूरिया , 5 किलोग्राम जायम का इस्तेमाल करे।


परवल की खेती मे सिंचाई

फसल की कटिंग लगाते समय तुरंत सिंचाई करे। फसल में नमी के अनुसार 7 से 8 दिन पर सिंचाई करे।

फसल की तुड़ाई

परवल की फसल में फल बनना शुरू होने के 15 से 18 दिन बाद तुड़ाई करनी चाहिए। फल के आकार के अनुसार तुड़ाई करे।


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