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मूंगफली की आधुनिक खेती एवं उन्नत किस्म

बुआई का समय

खरीफ में

बुआई का समय – 15 जून से 30 जुलाई के बीच

फसल अवधि – 90 से 130 दिन

जायद में

बुआई का समय – 1 मार्च से 20 अप्रैल के बीच

फसल अवधि – 90 से 130 दिन


तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई

मूंगफली की फसल में अच्छी पैदावार के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान सही रहता है । इस फसल के लिए बलुई दोमट मिटटी जिसमें जल निकास की अच्छी व्यवस्था हो ठीक रहती है ।

मूंगफली की खेती के लिए मिटटी का पीएच मान 6.0 से 6.5 के बीच होना चाहिए । मूंगफली की फसल बुवाई से 10 दिन पहले 1 एकड़ खेत में 2.5 किलोग्राम ट्रिकोडेर्मा और 10 किलोग्राम कार्बोफुरान का इस्तेमाल करे इसके बाद खेत की 2-3 जुताई हैरो या कल्टीवेटर से करके खेत को पाटा लगाकर समतल का चाहिए।


उन्नत किस्में ( Varieties )

  • ज्योति – अवधि 110 से 115 दिन मूंगफली के इस किस्म के को मध्यम आकार के होते हैं । यह किस्म 110 से 115 दिनों में तैयार हो जाती है । इसकी उपज क्षमता 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है ।
  • TG39 – अवधि 115 से 120 दिन इस किस्म के दाने बड़े होते हैं । यह किस्म 115 से 120 दिन में पक जाती है । इस किस्म की औसत पैदावार 25 से 30 क्विण्टल प्रति हैक्टेयर है ।
  • श्रीराम शिखर – अवधि 100 से 110 दिन यह 100 से 110 दिन की किस्म है । यह किस्म दुधारू पशुओं के चारे के लिए उपयुक्त है । इसके दाने बड़े आकार के होते है यह निर्यात के लिए उपयुक्त है ।
  • JL24 – अवधि 90 से 90 दिन यह गुच्छेदार , जल्दी पकने वाली किस्म है । यह 90 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है । यह पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भी जीवित रह सकती है । यह किस्म तना गलन रोग के प्रतिरोधक है । इसकी औसतन पैदावार 4-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ।
  • प्रकाश – अवधि 115 से 120 दिन मूंगफली की यह किस्म 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है । इसकी उत्पादन क्षमता 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है ।
  • राज दुर्गा – अवधि 115 से 120 दिन यह किस्म 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है । यह सिंचित और असिंचित दोनों तरह की भूमि के लिए उपयुक्त है । इसकी उत्पादन क्षमता 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है ।
  • MA10 – अवधि 125 से 130 दिन यह किस्म 125 से 130 दिना में तैयार हो जाती है । इससे प्रति हेक्टेयर 25 से 30 क्विंटल उपज की प्राप्ति होती है ।
  • G201 – अवधि पा 110 से 115 दिन यह सिंचित व असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त होती है । यह 110 से 115 दिनों में तैयार हो जाती है। इससे प्रति हेक्टेयर 20 क्विंटल उपज की प्राप्ति होती है ।

बीज की मात्रा

मूंगफली की 1 एकड़ फसल तैयार करने के लिए 35 से 40 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

बीज उपचार

मूंगफली के बीज को बोने से पूर्व स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस 0.5 % डब्ल्यूपी 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें।

बीजोपचार के उपरांत बीज को राइजोबियम कल्चर 5 ग्राम एवं पी.एस.बी. कल्चर 5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करें । बीज को कल्चर से उपचार करने के बाद छाया में सुखाकर उसी दिन बोनी करें ।

बुआई का तरीका

मूंगफली को कतार में बोना चाहिए । गुच्छे वाली / कम फैलने वाली किस्मों के लिये कतार से कतार की दूरी 30 से.मी. तथा फैलने वाली किस्मों के लिये 45 से.मी.रखें ।

पौधों से पौधों की दूरी 8-10 से . मी . रखनी चाहिए । बुवाई हल के पीछे , हाथ से या सीडड्रिल द्वारा की जा सकती है । भूमि की किस्म एवं नमी की मात्रा के अनुसार बीज जमीन में 5-6 से.मी. की गहराई पर बोना चाहिए ।


उर्वरक व खाद प्रबंधन

मूंगफली में खाद एवं उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर करना चाहिए । 50 क्विंटल गोबर की पकी हुई खाद , 200 किलोग्राम नीम खली , 100 किलोग्राम जिप्सम प्रति एकड़ खेत की अंतिम जुताई के समय खेत मे मिला देवे ।

डीएपी 50 किलोग्राम प्रति एकड़ , म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलोग्राम प्रति एकड़ बुआई के समय डाल दे।


सिंचाई

मूंगफली की फसल में ज्यादा सिचाई की जरुरत नहीं होती है । इस फसल में 3 से 4 सिंचाई की जरुरत होती है । नमी के अनुसार फसल में सिंचाई करते रहे ।

फसल की कटाई

मूंगफली में जब पुरानी पत्तियां पीली पड़कर झड़ने लगें और फली का छिलका कठोर होने पर फसल की कटाई शुरू कर दे ।



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