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चवला (बरबटी) लोबिया की खेती एवं उन्नत किस्म ?

चवला बुआई का समय

जायद में

बुआई का समय- 1 फ़रवरी से 31 मार्च के बीच

फसल अवधि- 60 से 110 दिन

खरीफ में

बुआई का समय- 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच

फसल अवधि- 60 से 110 दिन


तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई

  • लोबिया की खेती सभी तरह की मिट्टी में हो जाती है, लेकिन फसल से अधिक उत्पादन के लिए बलुई दोमट या हल्की काली मिट्टी अच्छी रहती है।
  • फसल के लिए चयन की गई भूमि का पी.एच मान 5.5 से 7 के बीच का होना चाहिए ।
  • फसल बुवाई के 15 दिन पहले मिट्टी पलटने वाले हल से 1 बार जुताई कर दे जिससे खेत में मौजूद खरपतवार और कीट नष्ट हो जाए।
  • इसके बाद प्रति एकड़ खेत में 10 से 12 टन सड़ी हुई गोबर की खाद और 2.5 किलो ट्राईकोडर्मा डाले।
  • खाद डालने के बाद खेत की 1 बार जुताई करके पाटा लगाकर पलेवा कर दे।
  • पलेवा के 6 से 8 दिन बाद 1 बार गहरी जुताई कर दे।
  • फसल बुवाई के समय प्रति एकड़ खेत में 25 किलो पोटाश , 25 किलो यूरिया , 40 किलो डीएपी , 10 किलो कार्बोफुरान , 5 किलो जायम का इस्तेमाल करे।
  • इसके बाद खेत में कल्टीवेटर द्वारा 2 बार आडी- तिरछी गहरी जुताई करके खेत पर पाटा लगा दे जिससे खेत समतल हो जाए।
  • अब खेत बुवाई के लिए तैयार है।

उन्नत किस्में ( Varieties of Cowpea )

पूसा फाल्गुनी- अवधि 60 से 70 दिन इस किस्म के पौधे बौने तथा झाड़ीनुमा होते हैं। तथा फसल अवधि 60-70 दिन , दाने सफेद रंग के , छोटे तथा बेलनाकार , उपज 10-15 क्विंक्विंटल हेक्टेयर , होती है।

पूसा कोमल- अवधि 50 से 55 दिन लोबिया की यह किस्म बैक्टीरियल ब्लाइट प्रतिरोधी है, इस किस्म की बुवाई तीनों ऋतुओं में की जाती है, इसकी फलियों का रंग हल्का हरा होता है, और 20 से 22 सेंटीमीटर लंबा होता है। इसकी औसतन उपज 100 से 120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। लोबिया की यह किस्म 50 दिनों में तैयार हो जाती है।

02 C152 – अवधि गुण 105 से 110 दिन यह 105-110 दिन की किस्म है , खरीफ की बुवाई के लिए उपयुक्त किस्म है ये इसकी उपज क्षमता 15-20 क्विं / हैक्टेयर है ।

पूसा दो फसली- अवधि 45 से 50 दिन यह किस्म तीनों ऋतुओं के लिए उपयुक्त होती है । इसकी फली का रंग हल्का हरा होता है । यह 45 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है । इसकी औसतन उपज 75 से 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है ।

पूसा ऋतुराज- अवधि 45 से 50 दिन यह किस्म गर्मी और बरसात दोनों मौसम के लिए उपयुक्त होती है । यह 45 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है । इसकी औसतन उपज 100 से 120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है ।


लोबिया की खेती मे बीज की मात्रा

लोबिया की 1 एकड़ फसल तैयार करने के लिए 10 से 12 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है ।

बीज उपचार

हाइब्रिड बीज पहले से उपचारित आते है, इनकी सीधी बुवाई की जा सकती है, अगर घर पर तैयार किया हुआ या देसी बीज की बुवाई करते है, तो इसे कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम + थिरम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित कर ले।

बुआई का तरीका

लोबिया की खेती मे बुवाई के समय पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 से 50 सेमी रखे।


उर्वरक व खाद प्रबंधन

फसल बुवाई से पहले खेत में 10 से 12 टन सड़ी हुई गोबर की खाद और 2.5 किलो ट्राईकोडर्मा का इस्तेमाल करे। फसल बुवाई के समय प्रति एकड़ खेत में 25 किलो पोटाश , 25 किलो यूरिया , 40 किलो डीएपी , 10 किलो कार्बोफुरान , 5 किलो जायम का इस्तेमाल करे ।

30 से 35 दिन की फसल होने पर 1 एकड़ खेत में 25 किलोग्राम यूरिया 5 किलोग्राम जायम का इस्तेमाल करे ।


बरबटी की सिंचाई

लोबिया की फसल को 5 से 6 सिंचाई की जरुरत होती है । नमी की अनुसार सिंचाई करते रहे । फसल की कटाई लोबिया की फसल में किस्मो के अनुसार 60 दिन पर कटा भरू हो जाती है ।

फसल की कटाई

लोबिया की फसल में किस्मो के अनुसार 60 दिन पर कटाई शुरू हो जाती है ।



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