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प्याज की खेती करने का आधुनिक तरीका ओर किस्म

इस पोस्ट मे हम प्याज की खेती करने का आधुनिक तरीका ओर इसकी अधिक पैदावार वाली किस्म के बारे मे जानेंगे –

प्याज की बुआई का समय

खरीफ में

बुआई का समय – 1 जून से 15 जुलाई के बीच

फसल अवधि – 95 से 140 दिन

रबी में

बुआई का समय – 1 अक्टूबर से 20 दिसंबर के बीच

फसल अवधि – 110 से 140 दिन

जायद में

बुआई का समय – 10 फ़रवरी से 30 मई के बीच

फसल अवधि – 100 से 140 दिन


तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई

  • प्याज की फसल में बढ़वार ग्रोथ की अवस्था में 15 से 18 डिग्री तापमान और कंद बनने की अवस्था में 20 से 25 डिग्री तापमान होना चाहिए।
  • प्याज की फसल रेतीली दोमट , चिकनी , गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है । लेकिन अधिक पैदावार के लिए गहरी दोमट और जलोढ मिट्टी वाली भूमि का चयन करें।
  • जिस खेत का चयन करे उसमें जल निकास की उचित व्यवस्था हो।
  • फसल के लिए चयन की गई भूमि का पी.एच मान 6 से 7 के बीच का होना चाहिए।
  • सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से 1 बार जुताई कर दे जिससे खेत में मौजूद खरपतवार और कीट नष्ट हो जाए।
  • अब देशी हल या कल्टीवेटर से 1 या 2 बार गहरी जुताई कर दे।
  • रोपाई के 15 दिन पहले प्रति एकड़ खेत में 10 से 12 टन सड़ी हुई गोबर की खाद और 2.5 किलो ट्राईकोडर्मा डाले।
  • खाद डालने के बाद खेत की 1 बार मिटटी पलटने वाले हल से जुताई करके पाटा लगा दे।
  • इसके बाद खेत में कल्टीवेटर द्वारा 2 बार आडी – तिरछी गहरी जुताई करके खेत पर पाटा लगा दे जिससे खेत समतल हो जाए। अब खेत प्याज की रोपाई के लिए तैयार है।

प्याज का नर्सरी प्रबंधन

प्याज की नर्सरी तैयार करने के लिए 3 मीटर लम्बी कियारी बना ले। इस क्यारी को लगभग 15 सेमी . जमीन से ऊँचाई पर बनाना चाहिए।

बुवाई के बाद शैय्या में बीजों को 2-3 सेमी . मोटी सतह जिसमें छनी हुई महीन मृदा एवं सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद से ढंक देना चाहिए।

इसके पश्चात् क्यारियों पर कम्पोस्ट , सूखी घास की पलवार ( मल्चिंग ) बिछा देते हैं जिससे भूमि में नमी संरक्षण हो सके ।

नर्सरी में अंकुरण हो जाने के बाद पलवार हटा देना चाहिए। इस बात का ध्यान रखे की नर्सरी में सिंचाई पहले फब्बारे से करने चाहिए।


प्याज की उन्नत किस्में ( Best Varieties of onion )

Shriram Redbulb – अवधि 90 से 100 दिन यह 90 से 100 दिन में तैयार होने वाली किस्म है। इसके बल्व का वजन 90 से 100 ग्राम तक होता है । यह खरीफ के मौसम की किस्म है।

Pusa Ridhi – अवधि 100 से 110 दिन यह किस्म खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है । इसकी गांठे सघन , समतल गोलाकार के साथ गहरे लाल रंग की होती हैं। इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

Shriram Deshika – अवधि 110 से 120 दिन यह 110 से 120 दिन में तैयार होने वाली किस्म है। इसके बल्ब का वजन 100 से 120 ग्राम तक होता है । यह रबी के मौसम में लगने वाली किस्म है।

भीमा गहरा लाल किस्म – अवधि 95 से 100 दिन इस किस्म के कंद 95-100 दिन में पककर तैयार हो जाते है।इसके कंद लाल रंग वाले चपटे और गोलाकार होते है। प्रति हेक्टेयर 20-22 टन औसतन उपज प्राप्त हो जाती है।

भीमा लाल – अवधि 105 से 110 दिन खरीफ ऋतु में इस किस्म के कंद 105 से 110 दिन में पककर तैयार हो जाते है। इससे प्रति हेक्टयर 18-22 टन उपज मिल जाती हैं।

भीमा सुपर – अवधि 100 से 105 दिन यह किस्म खरीफ ऋतु में 100 से 105 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं।प्रति हेक्टेयर जमीन से 220 से 250 क्विंटल प्याज प्राप्त हो जाती है।

भीमा शुभ्रा – अवधि110 से 115 दिन सफेद प्याज की फसल 110 से 115 दिनों में तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ खेत से 72 से 80 क्विंटल पैदावार प्राप्त हो जाती है।

भीमा श्वेता – अवधि 110 से 120 दिन यह किस्म 110 से 120 दिन में पक जाती है इसका भंडारण 3 महीने तक किया जा सकता है। प्रति एकड़ उत्पादन 72 से 80 क्विंटल पैदावार हो जाती है।

पूसा व्हाइट राउंड – अवधि 125 से 130 दिन इस किस्म की रोपाई के 125 से 130 दिनों में पक जाती है। प्रति एकड़ खेत से से 130 से 140 क्विंटल पैदावार प्राप्त हो जाती है।


बीज की मात्रा

प्याज की 1 एकड़ फसल तैयार करने के लिए 2 से 2.5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

बीज उपचार

हाइब्रिड सीड पहले से कंपनी दयारा उपचारित आता है अगर आप अपने घर पर तैयार किया हुआ बीज बुवाई करते है तो बुवाई से पहले 2 ग्राम कार्बोनडाज़िम / किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करे।

प्याज की बुआई का तरीका

प्याज की फसल बुवाई के समय पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी रखे । बीज को 1-2 सेमी की गहराई पर बोयें । प्याज की रोपाई के समय पौधा को सावधानी से निकाले।

पौधे को नर्सरी से निकालते समय नमी रखे और पौधे को ध्यानपूर्वक सावधानी से निकाले जिससे पौधे की जड़ न टूट पाएं । बीमारी से ग्रसित पौधों को अलग कर दे।

खेत में रोपाई के समय छोटा या बारीक पौधा नहीं लगाएं ऐसे पौधे लगाने से फसल में ग्रोथ करने में समय लगता है।


उर्वरक व खाद प्रबंधन – प्याज की खेती

बुवाई के समय प्याज की फसल बुवाई के समय 1 एकड़ खेत में 8 से 10 टन गोबर की खाद , 10 किलोग्राम कार्बोफुरान , 2.5 किलोग्राम ट्रिकोडेर्मा , 50 किलोग्राम DAP , 50 किलोग्राम पोटाश , 25 किलोग्राम यूरिया , 6 से 8 किलोग्राम सल्फर का इस्तेमाल करे।

बुवाई के 10 से 15 दिन बाद फसल रोपाई के 10 से 15 दिन बाद 10 ग्राम NPK 19:19:19 को 1 लीटर पानी के हिसाब से घोलकर स्प्रे करे।

बुवाई के 30 से 35 दिन बाद फसल रोपाई के 30 से 35 दिन बाद 1 एकड़ खेत में 25 किलोग्राम यूरिया का इस्तेमाल करे।

बुवाई के 45 से 50 दिन बाद फसल रोपाई के 45 से 50 दिन पर 1 एकड़ खेत में 25 से 30 किलोग्राम यूरिया खाद का इस्तेमाल करे।


प्याज की खेती मे सिंचाई

  • प्याज की फसल में पहली सिंचाई रोपण के तुरंत बाद करें।
  • दूसरी सिंचाई रोपाई के 4 से 5 दिन बाद करे जिससे अंकुरण अच्छा हो सके।
  • पौधो की वनस्पति वृद्धि और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहे।
  • जब कंद परिपक्त हो रहे हो तब सिचाई नही देना चाहिये।
  • फसल को निकालने के 2-3 दिन पहले सिचाई करनी चाहिये जिससे की फसल को निकालने में आसानी होती है ।
  • फसल के पकने के दौरान भूमि में नमी कम नही होना चाहिये अन्तः कंद के विकास में विपरीत प्रभाव पड़ता है।
  • फसल खुदाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें।

प्याज की फसल की खुदाई

प्याज की फसल में खुदाई समय से करे 50 % पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना शुरु हो जाए तब खुदाई कर ले। फसल की खुदाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है।


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