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लौकी की वैज्ञानिक खेती एवं उन्नत किस्म की जानकारी

सब्जियों में लौकी का एक महत्वपूर्ण स्थान है, लौकी की खेती पूरे भारत मे की जाती है। हमारे यहा ज्यादा दो प्रकार की लौकी की खेती की जाती है।

लम्बी लौकी और गोल लौकी, गोल वाली लौकी को पेठा लौकी के नाम से भी जाना जाता है,और लम्बी वाली लौकी को घिया के नाम से जाना जाता है। इस पोस्ट में हम लम्बी वाली लौकी की खेती के विषय मे जानकारी प्राप्त करेंगे।


बुआई का समय

खरीफ में

बुआई का समय- 1 जून से 31 जुलाई के बीच

फसल अवधि- 45 से 120 दिन

जायद में

बुआई का समय- 10 जनवरी से 31 मार्च के बीच

फसल अवधि- 45 से 120 दिन


तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई –

लौकी की फसल बुवाई से 20 दिन पहले 1 एकर खेत में 8 से 10 टन गोबर की खाद और 2.5 किलोग्राम ट्रिकोडेर्मा डालकर खेत की एक गहरी जुताई करे उसके बाद पलेवा कर दे । पलेवा के 5 से 6 दिन बाद खेत की 3 जताई करके पट्टा फेर दे।


लौकी की उन्नत किस्में ( Varieties )

श्रीराम चुटकी

अवधि 55 से 60 दिन इस किस्म की पहली तुड़ाई 55 से 60 दिन पर हो जाती है । इसके फल का वजन 500 से 600 ग्राम होता है । इसके फल की लम्बाई 40 से 45 सेमी तक होती है । यह किस्म खस्ता फफूदी की प्रतिरोधी किस्म है।

नुन्हेम्स – अनोखी

अवधि 50 से 60 दिन यह किस्म खरीफ और जायद दोनों समय में लगा सकते है। इस किस्म के फल आकर्षक, चमकदार और हरा बेलनाकार होते है। इसके फल का वजन 700 ग्राम से 1 किलोग्राम तक होता है। इस किस्म को सभी राज्यों में ऊगा सकते है।

मृदुला ( एनएस 6062 )

अवधि 40 से 45 दिन यह किस्म 40 से 45 दिन में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है । इसके फल गोल होते हैं , प्रत्येक फल का वजन 300-350 ग्राम होता है । फल का छिलका चिकना होता है और एक समान चमकता हरा रंग का होता है ।


लौकी की खेती मे बीज की मात्रा

लौकी की 1 एकड़ फसल तैयार करने के लिए 1 से 1.5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है ।

बीज उपचार

हाइब्रिड बीज पहले से ही उपचारित आते है इनको सीधे बुवाई में उपयोग कर सकते है । अगर घर पर बनाया हुआ बीज लगाना चाहते है तो इसको बुआई से पहले 2 ग्राम कार्बोनडाज़िम / किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित कर ले ।

बुआई का तरीका

लौकी की फसल बुवाई के समय पौधे से पौधे की दूरी 60 सेमी और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 150 से 180 सेमी रखे । बीज को 1 से 2 सेमी की गहराई पर बोए।


लौकी की खेती मे उर्वरक व खाद प्रबंधन

बुवाई के समय लौकी की फसल बुवाई के समय 1 एकड़ खेत में 50 किलोग्राम डी ऐ पी ( DAP ) , 25 किलोग्राम यूरिया ( Urea ) , 50 किलोग्राम पोटाश ( Potash ) , 8 किलोग्राम जायम , 10 किलोग्राम कार्बोफुरान का इस्तेमाल करे।

बुवाई के 20 से 25 दिन बाद लौकी की फसल बुवाई के 20 से 25 दिन पर 10 ग्राम NPK 19 : 19:19 को 1 लीटर पानी के हिसाब से घोलकर स्प्रे करे।

बुवाई के 40 से 45 दिन बाद लौकी की फसल बुवाई के 40 से 45 दिन पर 1 एकड़ खेत में 50 किलोग्राम यूरिया का इस्तेमाल करे ।

बुवाई के 50 से 60 दिन बाद लौकी की फसल बुवाई के 50 से 60 दिन पर 10 ग्राम NPK 0:52:34 और 2 मिली टाटा बहार को 1 लीटर पानी के हिसाब से घोलकर स्प्रे करे।


लौकी की खेती मे सिंचाई

जायद की फसल के लिए 7-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करे । खरीफ फसल में सिंचाई की आवश्यकता वर्षा न होने की स्थति में पडती है । रबी की फसल में नमी के अनुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करे ।

फसल की तुड़ाई

लौकी की तुड़ाई किस्मो के अनुसार 45 से 60 दिन पर शुरु हो जाती है फल की लम्बाई के अनुसार तुड़ाई कर ले।


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