WhatsApp Group - मंडी भाव

Join Now

कैसे करें हाईब्रिड करेले की खेती, पूरी जानकारी

समय के बदलाब साथ मे अब करेले की खेती भी एक मुनाफे की खेती हो गई है, जिसकी बाजार मे बहुत अच्छी मांग हे और बो भी बहुत ही अच्छे भाव के साथ। करेले के औषधीय गुण के कारण यह बाजार मे आसानी से बिक भी जाता है।

किसान वैज्ञानिक तरीके से करेले की खेती से अच्छा लाभ कमा रहे है,तो आइये हम भी करेले की हाईब्रिड खेती की विषय मे जानकारी लेते है।


बुआई का समय

खरीफ में

बुआई का समय- 10 जून से 31 जुलाई के बीच

फसल अवधि- 50 से 65 दिन

जायद में

बुआई का समय- 1 फ़रवरी से 31 मार्च के बीच

फसल अवधि- 50 से 65 दिन


तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई

करेला की फसल के लिए 18 से 36 डिग्री तापमान होना चाहिए। यह फसल बलुई दोमट मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है। मिट्टी का पी.एच मान 6.5 से 7.5 तक सही रहता है।

करेले की फसल बुवाई से 20 दिन पहले 1 एकर खेत में 8 से 10 टन गोबर की खाद डालकर खेत की एक गहरी जुताई करे उसके बाद 3 से 4 दिन तक खेत में पानी भरकर रखे । उसके 5 से 6 दिन बाद खेत की 3 जताई करके पट्टा फेर दे।

करेले की बुवाई से 10 दिन पहले खेत के चारो तरफ मक्का की बुवाई कर दे बीच बीच में 2 15 पौधे लगाए ऐसा करने से फसल में कीटों का प्रकोप कम हो जाता है।


करेले की खेती मे नर्सरी प्रबंधन

करेला की बुवाई सीधे खेत में की जा सकती है । या नर्सरी बनाकर भी कर सकते है। करेला की नर्सरी ट्रे या थर्माकोल के गिलास में बना सकते है। नर्सरी बनाने के लिए 1 भाग मिट्टी और 1 भाग सड़ी हुई गोबर की खाद ,1 भाग जले हुए चावल के छिलके या सबको 10 मिनट तक आग पर गरम करे या 8 घण्टे तक धूप में डाल दे।

इसके बाद इनको नर्सरी ट्रे या गिलास में भर ले। 2.5 ग्राम कॉपर ऑक्सी क्लोराइड को 1 लीटर पानी में घोलकर गिलास की मिटटी को गिला करे। 1 गिलास में 1 बीज के हिसाब से बुवाई कर दे। गिलासों को छाए या पॉली हाउस में रखे। सुबह शाम के समय में रोज आवश्कता के अनुसार पानी डालते रहे।


करेले की उन्नत किस्में ( Varieties )

Bayer Seed ( US 6214 )- अवधि 55 से 60 दिन यह मजबूत बेल एवं लम्बे समय तक फल देने वाली किस्म है। इस किस्म को दूर दराजों के बाजार तक ले जाना आसान है। इसके फल की लम्बाई 15 से 17 सेमी तक होती है।

Bayer Seed ( Resar )- अवधि 55 से 60 दिन इस किस्म की पहली तुड़ाई 55 से 60 दिन पर हो जाती है। इसके फल का वजन 80 से 90 ग्राम होता है। इसका रंग गहरा हरा होता है। यह किस्म बीमारियों के प्रति सहनसील है।

Shriram NANO- अवधि 50 से 55 दिन इस किस्म की पहली तुड़ाई 50 से 55 दिन पर हो जाती है। इसके फल का वजन 40 से 50 ग्राम होता है । इसके फल की लम्बाई 7 से 8 सेमी होती है । यह किस्म PM & D ‘ प्रतिरोधी है। इस किस्म को दूर दराजों के बाजार तक ले जाना आसान है।

Shriram Albela- अवधि अवधि 60 से 65 दिन इस किस्म की पहली तुड़ाई 60 से 65 दिन पर हो जाती है। इसके फल का वजन 100 से 125 ग्राम होता है। इसके फल की लम्बाई 18 से 20 सेमी होती है।

अर्का हरित- अवधि इसके फल मध्यम आकार के होते हैं। अन्य किस्मों की तुलना में कम कड़वे और फलों में बीज कम होता है। इसकी प्रत्येक बेल से 30 से 40 फल प्राप्त किए जा सकते हैं। इस किस्म के फलों का वजन 80 ग्राम होता है। प्रति एकड़ खेत से 36 से 48 क्विंटल तक पैदावार होती है।

पूसा हाइब्रिड 1- अवधि इस किस्म की खेती उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में अधिक की जाती है। इसके फल हरे व चमकदार होते हैं। इसकी तुड़ाई 55 से 60 दिनों में कर सकते हैं। प्रति एकड़ जमीन से 80 क्विंटल करेला प्राप्त किया जा सकता है।

पूसा हाइब्रिड 2- अवधि यह किस्म बिहार , झारखंड , उत्तर प्रदेश , पंजाब , छत्तीसगढ़ , ओडिशा , आंध्र प्रदेश , राजस्थान , गुजरात , हरियाणा एवं दिल्ली में खेती करने के लिए उपयुक्त है। इस किस्म के फलों का रंग गहरा हरा और फलों की लंबाई मोटाई मध्यम होती है। करीब 52 दिनों बाद पहली तुड़ाई की जा सकती है। प्रति एकड़ खेत से 72 से 75 क्विंटल पैदावार मिल जाती हैं।

प्राइवेट सेक्टर की संकर किस्में- अवधि प्राइवेट सेक्टर की संकर किस्में : यू एस 1315 ( बायर सीड ) , अभिषेक ( सेमिनिस ) , अमनश्री ( नूनहेम्स ) , NS 1024 ( नामधारी )।

पूसा विशेष- अवधि इसकी खेती उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में की जाती है। इसके फल मोटे एवं गह चमकीले हरे रंग के होते हैं। इसका गूदा मोटा होता है। पौधों की लंबाई करीब 1.20 मीटर होती है। प्रत्येक फल करीब 155 ग्राम के होते हैं। प्रति एकड़ जमीन से 60 क्विंटल तक पैदावार मिल जाती है।


करेले की खेती मे बीज की मात्रा

करेला की 1 एकड़ फसल तैयार करने के लिए 600 से 800 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

बीज उपचार

हाइब्रिड बीज पहले से ही उपचारित आते है इनको सीधे बुवाई में उपयोग कर सकते है। अगर घर पर बनाया हुआ बीज लगाना चाहते है तो इसको बुआई से पहले 2 ग्राम कार्बोनडाज़िम / किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित कर ले।

बुआई का तरीका

करेला की बुवाई नर्सरी बनाकर की जा सकती है, या सीधे खेत में बुवाई कर सकते है बुवाई के समय पौधे से पौधे की दूरी 60 सेमी और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 150 से 180 सेमी रखे । बीज को 3 से 4 सेमी की गहराई पर बोये।


करेले की खेती मे उर्वरक व खाद प्रबंधन

बुवाई के समय करेले की फसल बुवाई के समय 1 एकर खेत में 50 किलोग्राम डी ऐ पी ( DAP ) , 100 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट , 50 किलोग्राम यूरिया ( Urea ) , 50 किलोग्राम पोटाश ( Potash ) , 10 किलोग्राम फ्यूराडान ( Furadan ) , 5 किलोग्राम जायम , 500 ग्राम कॉपर ऑक्सी क्लोराइड ( Copper oxi chloride ) गढ़ों की मिटटी को तर करने के लिए इस्तेमाल करे।

बुवाई के 25 से 30 दिन बाद करेले की फसल बुवाई से 25 से 30 दिन बाद फसल में निराई गुड़ाई करके पौधे पर मिटठी चढ़ाए।निराई के समय खेत में 50 किलोग्राम डी ऐ पी ( DAP ) , 4 टन गोबर की खाद , 8 किलोग्राम टाटा रैलीगोल्ड ( Ralligold ) का इस्तेमाल करे।

बुवाई के 50 से 55 दिन बाद करेले की फसल में 15 दिन के अंतराल पर 1 एकड़ खेत में 250 मिली टाटा बहार को 100 लीटर पानी में घोलकर पौधे पर स्प्रे करते रहे ऐसा करने से बेल अच्छी तरह से चलती रहती है।


करेले की खेती मे सिंचाई

करेला की बुवाई अगर नर्सरी से हो रही है तो रोपाई के तुरंत बाद सिचाई करे। गर्मियों के मौसम में प्रत्येक 6-7 दिनों के बाद सिंचाई करते रहे और बारिश के मौसम में जरूरत पड़ने पर सिंचाई करें। इस फसल को कुल 8-9 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।

फसल की तुड़ाई

करेला की फसल में तुड़ाई किस्मो आधार पर 50 दिन पर शुरू हो जाती है। फलो के आकार के अनुसार तुड़ाई कर ले।


इन्हे भी पढे :-


Leave a Comment

ऐप खोलें