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कटहल की खेती से कमाएं अधिक मुनाफा, जानिए कैसे

कटहल की खेती कई राज्यों मे की जाती है,जिसमे मुख्य बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल है। कटहल की मार्केट में अच्छी मांग होने के कारण किसान कटहल की खेती कर बहुत अधिक लाभ कमा सकते हैं।

इसके पेड़ो को अधिक देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है। यहां हम कटहल की खेती के लिए कुछ अच्छी जानकारियां दे रहे हैं, जिन को अपना कर के आप कटहल की बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।


खरीफ में

बुआई का समय- 1 जुलाई से 30 सितंबर के बीच होता है।

तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई

कटहल की खेती करने के लिए दोमट मिटटी जिसमे जल निकास उचित हो अच्छी मानी जाती है। खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करके पटा लगा दे। पौध लगाने के लिए 10 * 10 मीटर की दूरी पर 1 * 1 * 1 मीटर के आकार के गड्ढ़े बना दे।

इन गड्ढे को 1 हफ्ते तक खुला छोड़ दे। इसके बाद गड्ढे में 40 से 50 किलोग्राम गोबर की खाद ,1 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट और 100 ग्राम carbofuron का इस्तेमाल करे। इसके बाद सिंचाई करके मिटटी ओट आने पर पौध रोपड़ कर दे।


कटहल की खेती मे नर्सरी प्रबंधन

कटहल मुख्य रुप से बीज द्वारा प्रसारित किया जाता है , एक समान पेड़ तैयार करने के लिए वानस्पतिक विधि द्वारा पौधा तैयार करना चाहिए । वानस्पतिक विधि में कलिकायन तथा ग्राफ्टिंग अधिक सफल पायी गयी है।

इस विधि से पौधा तैयार करालए मूल वृन्त की आवश्यकता होती है । जिसके लिए कटहल के बीजू पौधों का प्रयोग किया जाता है ।


कटहल की उन्नत किस्में ( Varieties )

  • स्वर्ण मनोहर- अवधि छोटे आकार के पेड़ में बड़े – बड़े एवं अधिक संख्या में फल देने वाली यह एक उम्दा किस्म है । मध्यम घने छत्रक वाले इस किस्म में फरवरी के प्रथम सप्ताह में फल लग जाते हैं ।
  • Singapore or Ceylon Jack- अवधि यह जल्दी फल देने वाली किस्म है । इसके फल मध्यम आकार के मीठे होते हैं और गुद्दा कुरकुरा होता है । इसका मादा प्रजनन अंग पीले रंग का , छोटा और गुठली से चिपका हुआ और तेज सुगंध वाला होता है ।

कटहल की खेती मे बीज की मात्र

एक एकड़ में लगभग 30 -35 पौधे लगाए जाते हैं ।

बीज उपचार

बिजाई से पहले बीजों को NAA 25 पी पी एम के घोल में 24 घंटे के लिए भिगो कर रखें । यह बीजों के जल्दी अंकुरण के साथ अच्छी वृद्धि में भी मदद करेगा ।

बुआई का तरीका

कटहल का पौधा आकार में बड़ा तथा अधिक फैलावदार होता हैं । पौधा को 10 x 10 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है ।


कटहल की खेती मे उर्वरक व खाद प्रबंधन

कटहल के 1 साल के पौधो में 10 किलोग्राम गोबर की खाद , 150 ग्राम यूरिया , 50 ग्राम डी ए पी , 100 ग्राम पोटाश का इस्तेमाल करे । इस उर्वरक की मात्रा के अनुसार हर साल उर्वरक बढ़ाते रहे ।

गोबर की खाद का इस्तेमाल दिसंबर में यूरिया और पोटास की आधी मात्रा का इस्तेमाल जनवरी माह में करे । अंत में फूल आने के समय शेष उर्वरक का इस्तेमाल करे ।


सिंचाई

कटहल के पौधो में नमी के अनुसार सिंचाई करे गर्मियों में 2 हफ्ते के अंतराल पर और सर्दियों में 1 महीने के अंतर् पर सिंचाई करते रहे ।

फसल की तुड़ाई

फसल बिजाई के 7 वर्षों बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। कलम वाले पौधे 4 वर्ष में उपज देना शुरू करते हैं। फूल निकलने के बाद 3 से 8 महीने में फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं।


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