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टिंडा की खेती केसे करे,जानिए किस्मे और पेदावार

टिंडे का मूल स्थान भारत है। इसके कच्चे फल सब्जी बनाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। टिंडा की खेती Cucurbitaceae (कुकर बिटेसी) परिवार की यह सब्ज़ी बहुत ही गुणकारी है।

टिंडे को round melon, round gourd, Indian squash भी कहा जाता है| यह उत्तर भारत की सबसे महत्तवपूर्ण गर्मियों की सब्जी है।

टिंडे की औषधीय विशेषताएं भी हैं, सूखी खांसी और रक्त संचार सुधारने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। टिंडे की खेती उत्तरी भारत में, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और आन्ध्र प्रदेश में की जाती है।


बुआई का समय

जायद में

बुआई का समय- 1 फ़रवरी से 31 मार्च के बीच

फसल अवधि- 70 से 80 दिन

खरीफ में

बुआई का समय- 1 जून से 31 जुलाई के बीच

फसल अवधि- 70 से 80 दिन


तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई

  • इसकी खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है।
  • फसल के लिए चयन की गई भूमि का पी.एच मान 6 से 7 के बीच का होना चाहिए।
  • फसल बुवाई के 20 दिन पहले मिट्टी पलटने वाले हल से 1 बार जुताई कर दें जिससे खेत में मौजूद खरपतवार और कीट नष्ट हो जाए।
  • इसके बाद प्रति एकड़ खेत में 10 से 12 टन सड़ी हुई गोबर की खाद और 2.5 किलो ट्राईकोडर्मा डालें।
  • खाद डालने के बाद खेत की 1 बार जुताई करके पाटा लगाकर पलेवा कर दें।
  • पलेवा के 6 से 8 दिन बाद 1 बार गहरी जुताई कर दें।
  • बुवाई के समय प्रति एकड़ खेत में 50 किलो डीएपी , 50 किलो पोटाश , 25 किलो यूरिया , 100 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट का इस्तेमाल करे।
  • इसके बाद खेत में कल्टीवेटर द्वारा 2 बार आडी – तिरछी गहरी जुताई करके खेत पर पाटा लगा दें जिससे खेत समतल हो जाए।
  • अब खेत बुवाई के लिए तैयार है।

टिंडा की उन्नत किस्में ( Varieties )

Tinda 48- अवधि 70 से 80 दिन इसकी बेल 75 से 100 सैं.मी. लम्बी होती है । इसके पत्ते हल्के हरे रंग और फल सामान्य आकार के होते है । इसके फल गोल चमकीले हल्के हरे रंग के होते है । इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ।

बीकानेरी ग्रीन- अवधि 65 से 70 दिन यह राजस्थान की किस्म है । यह खरीफ के मौसम में उगने वाली किस्म है। इसका फल मुलायम और हरा होता है।

Pusa Alankar- अवधि 70 से 80 दिन यह बहुत जल्दी और अधिक उपज देने वाली किस्म है। इसके फल गहरे हरे रंग के होते हैं । इसका गुद्दा नर्म और अच्छे स्वाद वाला होता है।


टिंडा की खेती मे बीज की मात्रा

टिंडा की 1 एकर फसल तैयार करने के लिए 1 से 1.5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

बीज उपचार

हाइब्रिड बीज पहले से उपचारित आते है । इनकी सीधी बुवाई की जा सकती है । अगर घर पर तैयार किया हुआ बीज की बुवाई करते है तो इसे कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम + थिरम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित कर ले।

बुआई का तरीका

टिंडा की फसल बुवाई के समय पौधे से पौधे की दूरी 30 सेमी और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेमी रखनी चाहिए।


टिंडा की खेती मे उर्वरक व खाद प्रबंधन

बुवाई के समय टिंडा की फसल बुवाई के समय 1 एकड़ खेत में 50 किलोग्राम डी ऐ पी , 50 किलोग्राम पोटाश , 25 किलोग्राम यूरिया , 100 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट का इस्तेमाल करे।

बुवाई के 25 से 30 दिन बाद टिंडा की फसल बुवाई के 25 से 30 दिन बाद 1 एकड़ खेत में 20 किलोग्राम यूरिया खाद का इस्तेमाल करे।

बुवाई के 45 से 50 दिन बाद टिंडा की फसल बुवाई के 45 से 50 दिन बाद 10 ग्राम NPK 13 : 0:45 को 1 लीटर पानी के हिसाब से घोलकर स्प्रे करे।

बुवाई के 60 से 70 दिन बाद फसल बुवाई के 60 से 70 दिन बाद 3 मिली हयूमिक एसिड और 5 ग्राम 12:61:00 एनपीके को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।


टिंडा की खेती मे सिंचाई

टिंडा की फसल में गर्मियों के मौसम में , 4-5 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें । बारिश के मौसम में बारिश के आधार पर सिंचाई करें।

फसल की तुड़ाई

टिंडा की फसल में किस्मो के अनुसार 70 से 75 दिन पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है । फलो के आकार के अनुसार तुड़ाई करे।


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