रबी 2026: चना-सरसों MSP व भाव आउटलुक, 50% आयात शुल्क का असर

रबी फसलों की बोवनी की उल्टी गिनती शुरू होते ही मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसान एक बड़े फैसले के मोड़ पर खड़े हैं। इस बार खेत में चना बोया जाए या सरसों? दोनों ही फसलें कम पानी में पकने वाली प्रमुख नकदी फसलें हैं, लेकिन इस रबी सीजन 2026-27 में बाज़ार का समीकरण पिछले वर्षों की तुलना में पूरी तरह बदल चुका है।

बदलाव की सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में उठाया गया कड़ा व्यापारिक कदम है। सरकार ने विदेशी सस्ती दलहन (पीली मटर) और कच्चे खाद्य तेलों के बेलगाम आयात पर लगाम लगाते हुए आयात शुल्क को बढ़ाकर 50% तक कर दिया है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि विदेशी माल सस्ता नहीं रहा और घरेलू मंडियों में देसी चना और सरसों की मांग अचानक मजबूत हो गई है।

साथ ही, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) द्वारा आगामी विपणन वर्ष के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की सिफारिशों ने किसानों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।


चना बनाम सरसों: MSP दरें और मौजूदा मंडी भाव की स्थिति

किसान भाई नीचे दी गई तालिका से चना और सरसों के सरकारी समर्थन मूल्य और प्रमुख मंडियों के हाजिर भाव की तुलना समझ सकते हैं:

रबी फसलकैबिनेट स्वीकृत नई MSPMSP में प्रति क्विंटल वृद्धिमंडियों में चालू भाव (रेंज)
चना (देसी/विशाल)₹5,958 प्रति क्विंटल+ ₹83 की बढ़त₹6,400 से ₹7,100 प्रति क्विंटल
सरसों (रायड़ा/तिलहन)₹6,613 प्रति क्विंटल+ ₹413 की बड़ी बढ़त₹5,600 से ₹6,200 प्रति क्विंटल
मसूर (दाल)₹7,390 प्रति क्विंटल+ ₹390 की बढ़त₹6,200 से ₹6,700 प्रति क्विंटल
गेहूं₹2,610 प्रति क्विंटल+ ₹25 की बढ़त₹2,450 से ₹2,750 प्रति क्विंटल

आधिकारिक आंकड़े: केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा स्वीकृत नई MSP दरें व Agmarknet हाजिर मंडी भाव।

कृषि उपज मंडी में दलहन और तिलहन फसलों की तुलाई

चित्र: मंडियों में चने का हाजिर भाव एमएसपी से 1,000 से 1,500 रुपये ऊपर चल रहा है।


1. चने का बाजार आउटलुक: क्या मार्च 2027 तक भाव तेज रहेगा?

इस समय मंडियों में चने के भाव अपने उच्चतम स्तर पर हैं। इसके पीछे 3 ठोस जमीनी कारण हैं:

  • सरकारी बफर स्टॉक खाली होना: नाफेड (NAFED) के पास इस समय पुराने चने का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। सरकार के पास बाजार में भाव गिराने के लिए ओपन सेल का दबाव नहीं बचा है।
  • पीली मटर पर 50% ड्यूटी: पिछले साल कनाडा और रूस से भारी मात्रा में सस्ती पीली मटर आयात हुई थी जिससे बेसन मिलों में चने की जगह मटर खप रही थी। अब 50% ड्यूटी लगने से मिलर्स केवल देसी चने की ही खरीद कर रहे हैं।
  • फसल की लागत और पानी: चने को केवल 1 से 2 हल्की सिंचाई की जरूरत होती है। जिन इलाकों में कुओं या बोरवेल में पानी कम है, वहां चने की खेती सबसे सुरक्षित और ज्यादा मुनाफे वाली मानी जा रही है।

2. सरसों का बाजार आउटलुक: क्या इस बार तेल मिलें अच्छा भाव देंगी?

पिछले रबी सीजन में सरसों के किसानों को अपनी उपज समर्थन मूल्य से नीचे बेचनी पड़ी थी, क्योंकि इंडोनेशिया और मलेशिया से सस्ता पाम ऑयल भारत आ रहा था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है:

  • खाद्य तेलों पर कस्टम ड्यूटी में उछाल: भारत सरकार ने क्रूड पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क में भारी वृद्धि की है। इसका सीधा असर घरेलू सरसों तेल की कीमतों पर पड़ा है।
  • तेल मिलों की पेराई मांग: जयपुर, अलवर और मुरैना की प्रमुख तेल मिलों में सरसों की दैनिक खपत बढ़ गई है। आने वाले त्योहारी और रबी सीजन में सरसों के भाव ₹6,000 के पार टिके रहने की प्रबल संभावना है।
  • उत्पादन और ठंड का रोल: सरसों 125 से 135 दिन में तैयार होती है। अगर जनवरी में पाला (Frost) नहीं पड़ता है, तो सरसों प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल तक आराम से निकलती है।

किसान भाई क्या रणनीति अपनाएं? (विशेषज्ञ सलाह)

यदि आप रबी 2026 में फसल चयन को लेकर असमंजस में हैं, तो ये व्यावहारिक सुझाव आपके काम आएंगे:

  1. पानी की उपलब्धता जांचें: यदि आपके पास केवल 1-2 सिंचाई का पानी है, तो आंख बंद करके चना लगाएं। यदि 2-3 सिंचाई और हल्की दोमट जमीन है, तो सरसों बेहतरीन विकल्प है।
  2. सारे अंडे एक टोकरी में न रखें (फसल विविधीकरण): यदि आपके पास 5 एकड़ जमीन है, तो पूरे खेत में एक ही फसल लगाने के बजाय 3 एकड़ में चना और 2 एकड़ में सरसों लगाएं। इससे मौसम या पाले का जोखिम बंट जाता है।
  3. उन्नत किस्मों का चुनाव करें:
    • चना: आरवीजी 202, जेएकी 9218 या पूसा 3043 (उकठा रोग प्रतिरोधी)।
    • सरसों: पायनियर 45S46, गिरिराज (DRMRI 150-35) या आरएच 725 (उच्च तेल प्रतिशत वाली किस्में)।

🌾 देश-प्रदेश की सभी प्रमुख मंडियों के लाइव भाव, कमोडिटी विश्लेषण और मौसम के ताज़ा अपडेट्स के लिए mkisan.net पर रोज़ाना विज़िट करें।

राहुल पटेल उम्र 28 वर्ष, एक प्रगतिशील किसान और MKisan के मुख्य लेखक हैं। इन्हें खेती-किसानी और मंडी भाव का गहरा ज्ञान है, जो किसानों को रोज़ाना ताज़ा और सटीक जानकारी देने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।