रबी सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही खेतों में गेहूं की बुवाई की तैयारियां तेज हो गई हैं। हर साल किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इस बार कौन-सी किस्म लगाएं जिससे कम लागत में बंपर पैदावार मिल सके और मौसम के उतार-चढ़ाव में फसल खराब न हो। इस बीच देश के शीर्ष कृषि शोध संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI पूसा, नई दिल्ली) ने गेहूं की एक नई उन्नत किस्म Pusa Wheat 3471 (HD 3471) तैयार की है।
यह किस्म पूसा संस्थान की सबसे लोकप्रिय और सफल वैरायटी HD 3086 (पूसा गौतमी) का अपग्रेडेड रूप है। वैज्ञानिकों ने इसमें आधुनिक आणविक प्रजनन (MABB) तकनीक के जरिए सूखे और अचानक बढ़ने वाले तापमान (Terminal Heat) को झेलने वाले विशेष गुण जोड़े हैं। ट्रायल के दौरान इसकी अधिकतम आनुवंशिक पैदावार क्षमता 71 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (लगभग 28 से 30 क्विंटल प्रति एकड़) तक दर्ज की गई है।
सीधी बात यह है कि मार्च के महीने में जब अचानक तेज धूप और पछुआ हवाएं चलती हैं, तो सामान्य गेहूं के दाने सिकुड़ जाते हैं। लेकिन HD 3471 की बनावट ऐसी रखी गई है कि यह गर्मी के झटके में भी दानों का वजन कम नहीं होने देती।
HD 3471 गेहूं की प्रमुख विशेषताएं और क्षमता
किसान भाई नीचे दी गई तालिका से HD 3471 के तकनीकी पहलुओं को आसानी से समझ सकते हैं:
| विशेषता (पैरामीटर) | HD 3471 (पूसा गेहूं) का विवरण |
|---|---|
| विकसित करने वाला संस्थान | ICAR – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI, पूसा) |
| औसत पैदावार | 54.6 से 58 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (22-24 क्विंटल/एकड़) |
| अधिकतम आनुवंशिक उपज | 71 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (28-30 क्विंटल/एकड़) |
| फसल पकने की अवधि | 140 से 145 दिन |
| सिंचाई की आवश्यकता | 4 से 5 सामान्य सिंचाई |
| रोग प्रतिरोधक क्षमता | पीला रतुआ (Yellow Rust) व भूरा रतुआ के प्रति पूर्ण प्रतिरोधी |
| दाने की गुणवत्ता | मोटा, चमकदार, अधिक प्रोटीनयुक्त और चपाती के लिए उत्तम |

चित्र: HD 3471 गेहूं के दाने ठोस, मोटे और सुनहरे होते हैं जिनका बाजार भाव भी सामान्य से बेहतर मिलता है।
किन राज्यों के किसानों के लिए सबसे उपयुक्त है?
कृषि वैज्ञानिकों ने HD 3471 को मुख्य रूप से North Western Plains Zone (NWPZ) और इससे सटे मध्य भारत के सिंचित इलाकों के लिए तैयार किया है:
- मध्य प्रदेश (MP): मालवा, निमाड़ और नर्मदा घाटी के वे जिले जहां गेहूं की समय पर बुवाई और पर्याप्त सिंचाई साधन उपलब्ध हैं।
- पंजाब एवं हरियाणा: समय पर बुवाई वाले सिंचित उपजाऊ इलाके।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश: दोमट मिट्टी वाले प्रमुख गेहूं उत्पादक जिले।
- राजस्थान: गंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा व भरतपुर संभाग के नहरी क्षेत्र।
बुवाई का सही समय और बीज दर (Agronomic Guidelines)
अधिकतम पैदावार लेने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए नियम इस प्रकार हैं:
- बुवाई का सर्वोत्तम समय: 25 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच। समय पर बोई गई फसल को ठंड का पूरा लाभ मिलता है और कल्ले (Tillering) अधिक फूटते हैं।
- बीज दर: सामान्य बुवाई के लिए 40 किलोग्राम प्रति एकड़ (100 किग्रा प्रति हेक्टेयर) बीज पर्याप्त है।
- बीज उपचार अनिवार्य: बुवाई से पहले थीरम या बाविस्टिन (2 ग्राम प्रति किग्रा बीज) से बीजोपचार अवश्य करें ताकि मिट्टी जनित फफूंद से जमाव प्रभावित न हो।
- खाद व उर्वरक प्रबंधन: बुवाई के समय प्रति एकड़ 1 बोरी डीएपी (50 किग्रा) और पोटाश डालें। पहली और दूसरी सिंचाई पर यूरिया को दो बराबर हिस्सों में बांटकर दें।
बीज कहां से मिलेगा और क्या सावधानी रखें?
चूंकि यह किस्म अभी विकसित होकर आधिकारिक कृषि ट्रायल्स और बीज गुणन (Seed Multiplication) चरण में है, इसलिए किसानों को बीज खरीदते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए:
- किसी भी अनाधिकृत प्राइवेट व्यापारी या सोशल मीडिया पर बिक रहे खुले बीज के झांसे में न आएं।
- प्रामाणिक ब्रीडर या फाउंडेशन बीज के लिए अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), राज्य कृषि विश्वविद्यालय या राष्ट्रीय बीज निगम (National Seeds Corporation) के अधिकृत केंद्र से ही संपर्क करें।
- यदि आपके इलाके में HD 3471 का बीज अभी उपलब्ध नहीं है, तो इसकी मूल उन्नत किस्म HD 3086 या HD 3226 भी रबी बोवनी के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।
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