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मूंग उत्पादन की उन्नत खेती तकनीक

बुआई का समय

खरीफ में

बुआई का समय – 1 जुलाई से 31 जुलाई के बीच

फसल अवधि – 60 से 70 दिन

जायद में

बुआई का समय – 1 फ़रवरी से 30 अप्रैल के बीच

फसल अवधि – 60 से 70 दिन


तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई

  • मूंग की खेती सभी तरह की मिट्टी में हो जाती है लेकिन फसल से अधिक उत्पादन के लिए दोमट से रेतीली दोमट मिट्टी अच्छी रहती है।
  • फसल के लिए चयन की गई भूमि का पी.एच मान 5.5 से 7 के बीच का होना चाहिए ।
  • फसल बुवाई के 15 दिन पहले मिट्टी पलटने वाले हल से 1 बार जुताई कर दे जिससे खेत में मौजूद खरपतवार और कीट नष्ट हो जाए।
  • खेत की 1 बार जुताई करके पाटा लगाकर पलेवा कर दे ।
  • पलेवा के 6 से 8 दिन बाद 1 बार गहरी जुताई कर दे ।
  • इसके बाद खेत में कल्टीवेटर द्वारा 2 बार आडी – तिरछी गहरी जुताई करके खेत पर पाटा लगा दे जिससे खेत समतल हो जाए ।
  • अब खेत बुवाई के लिए तैयार है

उन्नत किस्में ( Varieties )

  • टाइप 44 अवधि 60 से 65 दिन इसका पौधा बौना होता है । तना अर्धस्तरीय और पत्तियाँ गहरे रंग की होती हैं । फूल पीले होते हैं । बीज गहरे हरे रंग के और मध्यम आकार के होते हैं ।
  • पूसा विशाल – अवधि 65 से 70 दिन यह किस्म विषाणु जनित पीली चित्ती रोग की प्रतिरोधी है। यह किस्म बसंत के मौसम में 65-70 दिन और ग्रीष्म में 60-65 दिनों में पककर तैयार हो जाती है ।
  • पूसा -0672- अवधि 65 से 70 दिन यह किस्म मूंग के विषाणु जनित पीली चित्ती रोग व अन्य रोगों की सहिष्णु है । इसका दाना चमकदार हरा , आकर्षक एवं मध्यम आकार का होता है ।
  • पूसा बैशाखी – अवधि 60 से 70 दिन यह किस्म 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 3.2-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
  • शक्तिवर्धक विराट – अवधि 70 से 80 दिन इस किस्म की बुवाई ग्रीष्म और खरीफ ऋतु में कर सकते हैं । इसका पौधा सीधा , सख्त , कम बढ़ने वाला और फली में 10-12 दाने होते हैं । यह 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं।
  • टाइप 1 – अवधि 60 से 62 दिन इस किस्म के दाने चमकीले हरे रंग के होते हैं । यह 60-62 दिन में पककर तैयार की जाती है । इसके प्रति हेक्टेयर खेत से 8-10 क्विंटल उपज मिल जाती है।

बीज की मात्रा

बसंत कालीन बुवाई हेतु 20 -22 किलोग्राम तथा खरीफ फसल हेतु 10-12 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है ।


बीज उपचार

मूंग की बुवाई से पूर्व बीज को ट्राइकोडर्मा विरडी 1.0 % डब्ल्यूपी 4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें । तत्पश्चात इस उपचारित बीज को विशेष राईजोबियम कल्चर की 5 गाण मात्रा एवं पी एस बी कल्चर की 5 ग्राम मात्रा प्रति किलो बाज का दर से परिशोधित कर बोनी करें ।


बुआई का तरीका

मूंग की बुवाई 2 विधि से की जाती है छिटका विधि से या कतारों में । कतारों में बुवाई के समय पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी रखे । बीज को 3 से 4 सेमी की गहराई पर बोए । उर्वरक व खाद प्रबंधन मूंग में खाद एवं उर्वरको का उपयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए । सामान्यतया मूंग में 50 किलोग्राम डीएपी , 15 किलोग्राम मयूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकर बुआई के समय 5-10 सेमी . गहरी कूड़ में आधार खाद के रूप में दें ।


सिंचाई

मूंग की फसल में 4 से 5 सिंचाई की जरुरत होती है नमी के अनुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करे ।

फसल की कटाई

मूंग की फसल में जब 80 से 85 प्रतिशत फलियों पकने लग जाए तब कटाई शुरू करे । फसल को ज्यादा पकने नहीं देना चाहिए क्योकि इससे फलियां झड़ने लग जाती हैं । इसकी कटाई करें । कटाई के बाद फसल को थैशिंग करें ।



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