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केंचुआ पालन व्यवसाय शुरू करें, होगी 5 लाख रुपए की कमाई

केंचुएं से बनी जैविक खाद की भारी डिमांड

आजकल जैविक खेती का जमाना है, इस खेती में रासायनिक खाद की जगह जैविक या प्राकृतिक खाद का प्रयोग होता है। इस खाद को आप अपने खेतों में काम लेने के अलावा बेचकर भारी मुनाफा कमा सकते हैं। बता दें कि ग्रामीण परिवेश में केंचुआ पालन व्यवसाय किसानों को कुछ ही समय में मालामाल बना सकता है।

अगर आप किसान हैं और परंपरागत खेती  से आपकी आमदनी नहीं बढ़ रही है तो आज आपको ऐसा व्यवसाय बताते हैं, जो कम लागत में आसानी से शुरू किया जा सकता है। इससे लाखों रुपये प्रतिमाह की कमाई हो सकती है, आइए, जानते हैं केंचुआ पालन कैसे करें और इससे कैसे कमा सकते हैं, एक महीने में अधिकतम 5 लाख रुपये। 

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केंचुआ पालन के लिए ध्यान रखने योग्य बातें

बता दें कि केंचुआ पालन के लिए कुछ आवश्यक बातें हैं, जो यह व्यवसाय शुरू करने वालों को काफी फायदेमंद हो सकती हैं। यहां केंचुआ पालन  की इन मुख्य बातों पर गौर करना जरूरी हैं- 

  • केंचुओं को गीली और नरम जगह में रखना चाहिए। 
  • ध्यान रखें कि जहां केंचुओं का उत्पादन किया जा रहा है, उस स्थान पर सूर्य की किरणें सीधी नहीं पड़ें। 
  • यदि आप कंटेनर को अच्छी तरह से इंसुलेट करते हैं, तो ये ठंडे तापमान में भी जीवित रह सकते हैं। 
  • केंचुआ पालन के लिए ऐसा उपयुक्त स्थान चुनें जहां अंधेरा हो और तापमान की दृष्टि से यह थोड़ा गर्म रहे। 
  • केंचुआ पालन में यह भी ध्यान रखना जरूरी है, कि ये कीड़े काफी कठोर होते हैं, ऐसे में  ये 40 से 80 डिग्री सेल्सियस की सीमा में भी तापमान का सामना कर सकते हैं। 

ऐसे करें केंचुआ पालन के लिए कंटेनर का चयन 

यहां कंटेनर के चुनाव के लिए जरूरी बातें बताई गयी हैं, जो इस प्रकार हैं- 

  • केंचुआ पालन के लिए कंटेनर लकड़ी से बना होना चाहिए। 
  • केंचुआ पालन के लिए आप घर की चीजें भी उपयोग कर सकते हैं, जैसे कि एक पुराना खिलौना बॉक्स या एक ड्रेसर दराज। 
  • बॉक्स के तल में छेद करने के लिए ड्रिल की मदद लें। 
  • अगर पानी को ठीक से नहीं निकाला गया तो कीड़े उसी में मर जाएंगे इसलिए कंटेनर में छेदों को सही तरह से बनाएं।

केंचुआ पालन के लिए कंटेनर का चयन करते समय बताई गयी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है। यदि कंटेनर केंचुओं की वातावरण के अनुकूल होगा तो ही वे इसमें अधिक दिनों तक जीवित रह सकेंगे।

केंचुओं के लिए आरामगाह कैसे बनाएं 

जब केंचुएं तैयार हो जाएं तो इनके लिए एक बैडनुमा जगह भी चाहिए। इसके लिए कटे-फटे समाचार पत्र, कार्डबोड, पत्ते और अन्य कचरे वाला सामान अच्छा रहता है।

इसके अलावा कृमियों को भोजन संसाधित करने के लिए कुछ गंदगी जैसे अपशिष्ट पदार्थों की जरूरत होती है। इन सभी कचरों को मिट्टी के साथ मिला दें। ध्यान रहे कि जो भी कुछ कचरे के रूप में उपयोग कर रहे हैं वे जैविक होना चाहिए। 

केंचुआ खाद तैयार करने का तरीका 

केंचुओं से जैविक खाद कैसे तैयार होती है? इसके लिए केंचुआ पालन के साथ ही इनके लिए उपयुक्त भोजन जैसे कीड़े, डेयरी का अपशिष्ट, तैलीय खाद्य पदार्थ, अंडे के छिलके, फल एवं सब्जियों के छिलके जैसे कृमि भोजन भी उपलब्ध करवा सकते हैं।

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केंचुआ बिजनेस के कुछ टिप्स

आपने केंचुआ व्यवसाय शुरू कर दिया है, और इसमें केंचुआ तैयार हो गए हैं। अब इन केंचुओं से कैसे कमाएं? तो mkisan की इस पोस्ट मे हम आपको बताएँगे की इसे आप कहाँ बेच सकते है, ओर इससे कितना मुनाफा कमा सकते है, पोस्ट को आगे पड़ते रहिए इनसे बनी खाद को बेचने के अलावा और भी कई आसान तरीके हैं, जिनसे आपको अच्छी आमदनी हो सकती है।

आप अपने निकट किसी होटल या लांजिंग प्रतिष्ठानों को ये Earthworms बेच सकते हैं। यहां से आपको रेट भी अच्छे मिलेंगे। इसके अलावा जैविक खाद को बागवानों और नर्सरी में सप्लाई करें। वहीं मछली पकडऩे के चारा के रूप में एंगलर्स और चारा की दुकानों को बेच सकते हैं। 

केंचुआ से इस तरह से होती है इन्कम 

बता दें कि केंचुआ पालन एक अच्छे मुनाफे का व्यवसाय है। यदि आपने 4000 वर्ग फुट की जगह में केंचुआ पालन किया है, तो इसमें करीब 15,000 कृमि पनपा सकते हैं। ये कृमि आपको प्रति माह लगभग 5,00,526 रुपये का उत्पादन करेंगे। 300 केंचुए की कीमत वर्तमान में 10 डॉलर या 30 डॉलर यानि 2278 रुपये प्रति पाउंड है। 

वर्मी कंपोस्ट से जमीन की उर्वरा शक्ति में होता इजाफा 

वर्मी कंपोस्ट केंचुओं से तैयार की जाती है, इसलिए केंचुओं को किसानों का मित्र माना जाता है। वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करने से जमीन की उर्वराशक्ति लंबे समय तक बनी रहती है। केंचुआ पालने से जो खाद तैयार होती है उसे ही वर्मी कंपोस्ट कहा जाता है।

आजकल वर्मी कंपोस्ट की खासी डिमांड रहती है। बता दें कि यह खाद खरपतवार के बीज, जहरीले तत्व, रोगजनकों और ऐसे कारकों से पूरी तरह से मुक्त रहती है। वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से प्रति हेक्टेयर पैदावार बढ़ती है। इस खाद का उपयोग करने वाले किसानों को सरकार की ओर से सब्सिडी भी मिलती है। 

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