खेती-बाड़ी से दूर हट कर मुर्गी पालन (poultry Farming) जैसे व्यवसाय भी अब अधिक मुनाफे वाले बिजनेस के रूप में सामने आ रहे हैं, यदि मुर्गी पालन को सही व्यवस्थित तरीके से किया जाए तो इससे काफी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है ।
भारत ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में किसानों द्वारा मुर्गी पालन किया जाता है, वही शहरों में भी लोग मुर्गी पालन से काफी अच्छा पैसा कमा रहे हैं। मुर्गी पालन मैं बहुत सी चीजों का ध्यान रखना होता है, जैसे कि मौसम के अनुसार मुर्गियों की देखभाल, और उनके आहार का सही ध्यान रखना।
इसके बाद गर्मियों के समय में तो मुर्गी पालक को मुर्गियों का विशेष देखभाल और आहार पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि गर्मियों के मौसम में मुर्गियों में संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा मात्रा में होता है।
यदि गर्मियों के समय में मुर्गियों की सही देखभाल न की जाए और उन्हें पर्याप्त मात्रा में सही आहार नहीं मिल पाए तो कई मुर्गियां दम तोड़ देती हैं, जिससे के मुर्गी पालन को नुकसान होता है।
मुर्गियों का पालन सिर्फ अंडे प्राप्त करने के लिए ही नहीं किया जाता है, इसके अलावा इनका उपयोग बाजार में बिकने वाले चिकन के लिए भी किया जाता है, जिसके हमेशा काफी मांग बाजार में होती है।
हीट स्ट्रोक से मुर्गियों को खतरा – Heat stroke in chickens
विशेषज्ञों द्वारा बताया गया है, कि – गर्मियों के मौसम में मुर्गियों को बहुत ही अधिक परेशानी (Heat exhaustion) से गुजरना पड़ता है, और उनके अंडे देने की क्षमता भी कम होने लगते हैं, इसके अलावा मुर्गियों के मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी हो जाती है।
Heat stroke in chickens symptoms
- मुर्गी अपनी चोंच को खोलकर हापने लग जाती है।
- गर्मियों के समय में मुर्गियों के आहार कम खाने लग जाती है।
- अंडे उत्पादन में बहुत ज्यादा कमी होने लगती है।
- अंडे का आकार भी पहले के मुकाबले छोटा हो जाता है,
- अंडे का आवरण कमजोर पतला हो जाता है।
मुर्गी पालन को मुर्गियों की सही देखभाल के लिए मुर्गीशाला का तापमान नियंत्रण में रखना होता है, यदि तापमान 39 डिग्री से ज्यादा होता है, तो फिर मुर्गियों को परेशानी होने लगती है, इस स्थित को ही हीट स्ट्रोक (Chicken Heat Stroke) कहते हैं।

इस स्थिति में मुर्गी अपनी चोंच को खोलकर हापने लग जाती है, और शारीरिक रूप से कमजोर हो जाती है, लडखडाने लगती है, और लकवा होने से मुर्गी की मृत्यु भी हो जाती है।
गर्मियों के मौसम में मुर्गियों को दे अधिक प्रोटीन वाला आहार
गर्मियों के समय में मुर्गियों का आहार कम हो जाता है, वह कम दाना खाती है, उनकी भूख अन्य समय के मुकाबले काफी कम हो जाती है। जिसके कारण वह कमजोर हो जाती है, इसलिए गर्मियों के मौसम में मुर्गियों को आहार देते समय हमें इस बात का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी हो जाता है कि मुर्गी क्या आहार में पर्याप्त पोस्टिक तत्व है।
आहार में प्रोटीन विटामिन व मिनरल्स की मात्रा अधिक होनी चाहिए ताकि यदि मुर्गी कम मात्रा में भी आहार ले तब भी उसे पर्याप्त पोषक तत्व प्रदान हो सके और वह शारीरिक रूप से मजबूत और स्वस्थ रहें।
वहीं पर अंडों का छिलका पतला होने से बचाव हेतु मुर्गियों के आहार में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए इसके लिए दाने में ऑस्टोकेल्शियम लिक्विड पानी के माध्यम से मुर्गियों को दिया जाता है।
मुर्गियों को आहार देने का सही समय क्या है ?
विशेषज्ञों के अनुसार मुर्गियों को ठंडे समय में दाना खिलाना चाहिए क्योंकि मुर्गियां ठंडे समय में दाना खाना पसंद करते हैं, इसलिए दिन की रोशनी के अलावा बिजली की रोशनी और सुबह के समय में मुर्गियों का आहार प्रदान करें ताकि वह अच्छे से आहार का उपयोग कर सकें।
सामान्य रूप से देखा जाए तो मर गया 60 डिग्री से 80 डिग्री के बीच के तापमान को पसंद करती है, क्योंकि इस तापमान पर मुर्गियों के खुराक और अंडे देने की दर अधिक होती है। तापमान के इस से ज्यादा बढ़ जाने पर मुर्गियों को समस्या उत्पन्न होती है।
मुर्गियों के आहार में कमी आ जाती है, वह कम खाती है, और इसी कारण से अंडे भी कम देती है, जिससे मुर्गी पालन को नुकसान होता है, इसलिए मुर्गियों के आहार के समय का ध्यान रखना भी जरूरी हो जाता है।
मुर्गियों के लिए पानी की उचित व्यवस्था
गर्मियों के समय में जिस प्रकार इंसानों अधिक पानी की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मुर्गियों को भी गर्मी के समय में अधिक पानी की आवश्यकता होती है, मुर्गियों में पानी की खपत दोगुनी हो जाती है, इसी के लिए मुर्गियों को हर समय और ठंडे पानी की व्यवस्था होनी जरूरी है।
एक बात का ध्यान रखें पानी का बर्तन प्लास्टिक क्या जस्ते का नहीं हो इसके स्थान पर मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि मिट्टी के बर्तनों में पानी अधिक समय तक ठंडा रहे और मुर्गियों को ठंडा पानी प्राप्त हो सके।
गर्मी में मुर्गी के बिछावन का भी विशेष ध्यान रखें इसकी मोटाई 2 इंच से अधिक नहीं हो यदि बिछावन पुराना हो गया है, तो इसे बदल दे जिससे मुर्गियों में संक्रमण फैलने की संभावना कम होगी।
हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें ?
मुर्गियों में छोटे चूजों की अपेक्षा व्यवस्क मुर्गियों में हीट स्ट्रोक (heat stroke in poultry) के समस्या ज्यादा होती है, वहीं पर चूजे 42 डिग्री तक का तापमान सहन कर सकते हैं, लेकिन मुर्गी इस तापमान को नहीं सहन कर पाती हैं, और यही कारण है, कि हीट स्ट्रोक के कारण मुर्गियां परेशान हो जाती हैं, और दम तोड़ देते हैं, इससे बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जो कि नीचे दी गई हैं।
- जहां पर मुर्गियों को रखा गया है, उस घर की छत पर सफेद कलर का पेंट कर देना चाहिए ताकि ताकि सूर्य से आने वाली गर्मी को कम किया जा सके और अंदर का तापमान ठंडा बना रहे।
- घर के छत पर एस्बेस्टस की सीट भी लगाई जा सकती है, यह भी घर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।
- मुर्गी घर में जहां पर भी खिड़कियां है, वहां पर 3 से 5 फीट की दूरी पर टाट के पर्दे लगाकर और उनमें बार-बार पानी का छिड़काव कर के मुर्गे घर को ठंडा रखा जा सकता है।
- यदि फोगर्स की सुविधा उपलब्ध हो तो उसके द्वारा भी कुक्कुट साला को ठंडा रखा जा सकता है।
- इन सभी के अलावा कूलर एवं पंखे की मदद लेकर भी तापमान को नियंत्रण में रखा जा सकता।
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