धान बुआई की डायरेक्ट सिडेड राइस तकनीक – Direct Seeded Rice

नमस्कार, किसान भाईयों इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे DSR विधि (Direct Seeded Rice) अपनाकर आप कम खर्च और कम पानी में अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

कृषि अधिकारी का कहना है, कि इस विधि से बुआई करने पर न केवल खर्च कम होगा, बल्कि पानी की भी बचत होगी।

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DSR का फूल फॉर्म क्या है ?

DSR का फूल फॉर्म डायरेक्ट सिडेड राइस (Direct Seeded Rice) है, यानी धान की सीधी बुआई विधि। इस विधि में किसान सीड्रिल का उपयोग करके सीधी बुआई करते हैं, जिससे दो गुना खर्च की बचत होती है।

डीएसआर विधि को अपनाने के कई फायदे

डायरेक्ट सिडेड राइस (Direct Seeded Rice) विधि अपनाने से किसानों को कई फायदे होंगे जैसे की —

  • श्रम यानी मेहनत की बचत होती है।
  • फसल बुवाई कम समय में की जा सकती है।
  • फसल 7 से 10 दिन पहले पक जाती है।
  • जल की उपभोगता कम होती है।
  • जुताई बुवाई का खर्च कम आता है, जिससे ईंधन की भी बचत होती है।
  • पंक्ति में बुवाई करने से यांत्रिक विधि से खरपतवार नियंत्रण आसान होता है।
  • पौध सुरक्षा उपचार सुगमता पूर्वक किये जा सकते हैं।
  • धान की फसल से निकलने वाली मीथेन गैस कम होती है, जिससे वातावरण को फायदा होता है।

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इस विधि में बीज की व्यवस्था कैसे करें ?

बीज ऐसा होना चाहिए जिसमें धान की बुआई के बाद 100 से 110 दिन में धान पक जाए। प्रति हेक्टेयर 40 से 50 किलोग्राम धान लगता है। जून के अंत सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह तक सीधी बुआई की जा सकती है।

बुआई कितनी दूरी पर करे ?

बुआई के समय 25 सेमी की दूरी पर लाइनों में बुआई करें। गैर कृषि क्षेत्रों में पानी की उपभोगता दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, इसलिए इस विधि का उपयोग करके आप अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं।

कृषि विभाग की किसानों से अपील

कृषि विभाग UP ने किसानों से अपील की है, कि वे DSR विधि को अपनाएं। इससे धान की फसल जल्दी पक जाती है, जिससे अगली फसल, जैसे गेहूं की बुआई समय पर की जा सकती है।

अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करें। धन्यवाद!

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