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कृषि उड़ान 2.0 योजना से कैसे किसानों को मिलेगा इसका फायदा

किसानों को अपने उत्पाद को बेचने  के लिए एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है, ऐसे में उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. किसानों की फसलों को सही समय पर बाजार पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि उड़ान योजना की शुरुआत की गयी।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने कृषि उड़ान योजना 2.0 शुरू की है. इससे किसानों को सीधा फायदा होगा. किसानों को अपने उत्पाद को बेचने  के लिए एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है,

ऐसे में उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, कई बार तो उनकी फसल बाजार तक पहुंचते पहुंचते खराब हो जाती है जिससे किसानों की मेहनत बेकार हो जाती है।

किसानों को इस नुकसान से बचाने के लिए और फसलों को सही समय पर बाजार पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि उड़ान योजना की शुरुआत की गयी।

इसकी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने  पिछले साल बजट 2020-21 पेश करते समय की थी. 2021 में यह योजना शुरु हो गयी।

योजना को शुरू करने के लिए नेशनल रुट , इंटरनेशनल रुट और नागरिक उड्डन मंत्रालय का सहयोग लिया जाता है. इससे किसानो को कृषि उत्पादनों के लिए  परिवहन की दिशा में सहायता मिल रही है।

कृषि उड़ान 2.0 योजना से कैसे मिलेगा किसानों को फायदा

कृषि उड़ान योजना 2021 की मदद से किसान मछली के उत्पाद दूध और डेयरी उत्पाद, मांस जैसे उत्पाद को जल्द जल्द से उनके बाजार तक पहुंचा सकते हैं. क्योंकि  हवाई माध्यम से सबसे तेज यह कार्य हो सकता है।

इसलिए सरकार ने इसकी मदद से किसानों को लाभ पहुंचाने की सोची है।

देश के जो किसान इस योजना का लाभ उठाना चाहते है, उन्हें इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. इसके बाद किसान भाई इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

कृषि उड़ान  योजना के तहत सरकार से एयरलाइनों को भी प्रोत्साहन देगी।

देश के विभिन्न हिस्सों में कृषि उत्पादों के परिवहन के लिए हवाई अड्डा का इस्तेमाल किया जाएगा. योजना के तहत उड़ानों में कम से कम आधी सीटें सब्सिडी वाले किराए पर दी जाएगी।

कृषि उड़ान 2.0 की मुख्य विशेषताएं

हवाई परिवहन द्वारा कृषि-उत्पादों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाना और उसे प्रोत्साहित करना: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के चयनित हवाई अड्डों पर भारतीय मालवाहक विमानों और पी2सी विमानों के लिए लैंडिंग, पार्किंग, टीएनएलसी और आरएनएफसी शुल्क की पूर्ण छूट. इसमें मुख्य रूप से, एनईआर, पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है।

हवाई अड्डों के भीतर और हवाई अड्डों के बाहर माल ढुलाई से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करना: हब और स्पोक मॉडल और फ्रेट ग्रिड के विकास को सुगम बनाना. एनईआर, जनजातीय और पहाड़ी जिलों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना के तहत बागडोगरा और गुवाहाटी हवाई अड्डों और लेह, श्रीनगर, नागपुर, नासिक, रांची और रायपुर हवाई अड्डों पर एयरसाइड ट्रांजिट और पोतांतरण अवसंरचना बनाया जाएगा।

अन्य निकायों से रियायतें हासिल करना: उड़ान योजना के विस्तार हेतू मालवाहकों/पी2सी विमानों के लिए एटीएफ पर बिक्री कर को एक प्रतिशत तक कम करने के लिए राज्यों का समर्थन मांगना और उन्हें प्रोत्साहन देना।

कनवर्जेन्स तंत्र की स्थापना के माध्यम से संसाधन पूलिंग: मालवाहक, एयरलाइन और अन्य हितधारकों को कृषि उत्पाद के हवाई परिवहन को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन और रियायतें प्रदान करने के लिए अन्य सरकारी विभागों और नियामक निकायों के साथ करार करना।

तकनीकी कनवर्जेन्स: ई-कुशल (सतत समग्र कृषि-रसद के लिए कृषि उड़ान) का विकास . सभी हितधारकों को सूचना के प्रसार में सुविधा प्रदान करने के लिए मंच विकसित करना. इसके अलावा, राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के साथ ई-कुशाल का एकीकरण प्रस्ताव है।

कृषि उड़ान 2.0 के पहले चरण के लिए कुल 53 हवाई अड्डों का चयन किया गया है – उनमें से अधिकांश का संचालन एएआई द्वारा किया जाता है।

हवाई अड्डों का रणनीतिक चयन मुख्य रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र पर केंद्रित है. इसके अतिरिक्त यह उत्तर, संपूर्ण पश्चिमी तट और दक्षिणी भारत (दो द्वीपों सहित) को कवर करता है।

कृषि उड़ान 2.0 के कार्यान्वयन के लिए हवाई अड्डों का चयन पूरे देश को लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से किया जाता है।

देश के चुने हुए हवाई अड्डे न केवल क्षेत्रीय घरेलू बाजार तक पहुंच प्रदान करते हैं बल्कि उन्हें देश के अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार से भी जोड़ते हैं।

ई-कुशल (सतत समग्र कृषि-रसद के लिए कृषि उड़ान) का विकास. एक मंच विकसित करने का प्रस्ताव जो सभी हितधारकों को सूचना प्रसार में सुविधा प्रदान करेगा।

यह एक एकल मंच होगा जो प्रासंगिक जानकारी प्रदान करेगा और साथ ही योजना के समन्वय, निगरानी और मूल्यांकन में भी सहायता करेगा. ई-कुशल का राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के साथ एकीकरण का प्रस्ताव किया गया है।

हब और स्पोक मॉडल और फ्रेट ग्रिड (कार्गो टर्मिनलों के लिए चिन्हित स्थान) के विकास को सुगम बनाना।



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