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गोबर से बनाया जा रहा पुताई के लिए पेंट जाने कीमत

किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए सरकार के द्वारा कई प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही है। ताकि उन योजनाओं का लाभ उठाकर किसान और अधिक समृद्धि बन सके। इसी क्रम मे छत्तीसगढ़ सरकार की “गोधन न्याय योजना” बहुत ही लाभकारी साबित हो रही है।

2 रुपये प्रति किलो गोबर की खरीदी

सरकार की इस योजना में गांव में लगाए गए गोठानो के माध्यम से किसानों से 2 रुपये प्रति किलो के अनुसार गोबर की खरीदी की जाती है, और 4 रुपये प्रति लीटर के अनुसार किसानों से गोमूत्र की खरीदी की जा रही है।

गोबर और गोमूत्र का क्या उपयोग ?

सरकार द्वारा खरीदे गए इस गोबर को कई प्रकार से उपयोग में लाया जाता है, जैसे कि कंपोस्ट खाद का निर्माण ओर इसके साथ ही महिलाओं के समूह द्वारा कई प्रकार की वस्तु निर्माण में भी इस गोबर का उपयोग किया जाता है।

वही हम यदि गोमूत्र की बात करें तो गोमूत्र के द्वारा जीवामृत और कीटनाशक तैयार किया जा रहा है।

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गोबर से प्राकृतिक पेंट निर्माण

यदि हम गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने पर बात करें तो हाल ही में राज्य में गोबर के द्वारा प्राकृतिक पेंट निर्माण की शुरुआत की गई है।

आपको बता दें कि इसकी शुरुआत रायपुर के पास में स्थित “हीरापुर जरवाय” गौठान से हुई है, जिसको लेकर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख इंजीनियर ने विभागीय अधिकारियों को सभी शासकीय भवन के रंग रोगन कार्य में प्रयोग मे लाये जा रहे केमिकल पेंट के स्थान पर इस प्राकृतिक पेंट का उपयोग करने के लिए कहा है।

सरकारी भवनों में गोबर से बने पेंट का उपयोग

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर परिपालन में लोक निर्माण विभाग ने गोठनो से प्राप्त गोबर से निर्मित प्राकृतिक पेंट को विभाग निर्माण कार्यों के SOR मैं शामिल कर लिया है।

अब जो भी भवन निर्माण में रंग रोगन का कार्य होना होगा वह इस गोबर से निर्मित प्राकृतिक पेंट के द्वारा किया जाएगा। इसके लिए लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता के द्वारा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए है।

पुताई के लिए दर निर्धारित की गयी

लोक निर्माण विभाग द्वारा भवनों की पुताई के लिए दर निर्धारित की गई है, जिसमें नए भवन निर्माण पर दो या दो से अधिक कोट्स वॉशेबल डिस्टेंपर से पुताई के लिए 53 रुपये प्रति वर्ग मीटर और जो पुराने भवन हैं, उनकी पुताई के लिए ₹30 प्रति वर्ग मीटर की दर निर्धारित की गई है।

इसी तरह गोबर से निर्मित प्रीमियम एमल्शन पेंट से नवनिर्मित वॉल पेंटिंग की दर 69 रुपए प्रति वर्ग मीटर और पुराने भवनों पर पेंटिंग के लिए ₹41 प्रति वर्ग मीटर की दर निर्धारित की गई है।

प्राकृतिक पेंट का उत्पादन

  • छतीसगढ़ में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए 9619 गांवों में गौठानों की स्थापना की गई है।
  • राज्य के 75 गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट एवं पुट्टी निर्माण की इकाईयां तेजी से स्थापित की जा रही है।
  • इन इकाईयों के पूर्ण होने पर प्रतिदिन 50 हजार लीटर तथा साल भर में 37 लाख 50 हजार लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन होगा।
  • गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण का मुख्य घटक कार्बोक्सी मिथाईल सेल्यूलोज (सीएससी) होता है।
  • सौ किलो गोबर से लगभग 10 किलो सूखा CMC तैयार होता है, कुल निर्मित पेंट में 30 प्रतिशत मात्रा CMC की होती है।
gobar kharidi

गोबर से पेंट कैस बनाया जाता है ?

गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए सबसे पहले इसे डी वाटर डी वाटर कर्लिंग मशीन में डाला जाता है, और उसमें पानी मिलाकर इसका अच्छा घोल तैयार किया जाता है।

इस घोल में अन्य कई दूसरी सामग्रीया भी मिलाई जाती है, फिर इन सब को एक हाई स्पीड डिस्पेंसर मशीन में डाला जाता है, और वहां इसे अच्छी तरीके से मिलाया जाता है।

इसके बाद ही इससे पेंट और पुट्टी तैयार की जाती है, यहां पर लगी मशीनों के द्वारा 8 घंटे में 1000 लीटर पेंट तैयार किया जा सकता है, और इस काम को करने के लिए 22 महिलाएं कार्य से जुड़ी हुई है

गोबर से निर्मित पेंट की कीमत कितनी है ?

गोबर से निर्मित इस प्राकृतिक पेंट की कीमत 230 रुपये प्रति लीटर रखी गई है, जो कि अन्य मार्केट में उपलब्ध केमिकल युक्त पेंट की कीमत से आधी है, और यदि इसकी क्वालिटी की बात करें तो इसकी क्वालिटी ब्रांडेड कंपनियों के पेंट जैसी ही है।

हीरापुर जरवाय जहां पर इस प्राकृतिक पेंट को बनाया जा रहा है, वहां पर इस पेंट को बनाने के लिए 25 लाख रुपए की मशीनें लगाई गई है, जिनसे यह पेंट निर्मित किया जा रहा है।

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