रबी सीजन 2026 की बुवाई जोर-शोर से शुरू हो चुकी है। जिन किसान भाइयों के खेतों से सोयाबीन, मक्का या उड़द की कटाई हो चुकी है, उनके लिए 25 अक्टूबर से 10 नवंबर तक का समय सरसों की बुवाई के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इस समय दिन और रात का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो सरसों के बीज के अंकुरण और शुरुआती फुटाव के लिए एकदम सही है।
सरसों की खेती में सबसे बड़ा फैसला सही बीज का चुनाव होता है। अगर बीज कमजोर या पुराना चुन लिया जाए, तो चाहे जितनी भी खाद और सिंचाई दे दी जाए, पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति बीघा से ऊपर नहीं जाती। वहीं अगर सही हाइब्रिड या सुधरी हुई किस्म चुनी जाए, तो कम पानी और सामान्य लागत में भी 10 से 12 क्विंटल प्रति बीघा (25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) की बंपर पैदावार आराम से ली जा सकती है।
आज हम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा अनुशंसित ऐसी ही 3 प्रमुख हाइब्रिड व उन्नत किस्मों की बात करेंगे, जिन्होंने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के खेतों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
सरसों की टॉप 3 हाइब्रिड किस्में: एक नजर में तुलना
| किस्म का नाम | विकसित करने वाला संस्थान | पकने का समय | तेल प्रतिशत | औसत पैदावार (प्रति हेक्टेयर) |
|---|---|---|---|---|
| RH 725 | चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि वि.वि. (HAU) | 135 – 140 दिन | 39.5 – 40% | 25 से 28 क्विंटल |
| पायनियर 45S46 (Pioneer) | पायनियर सीड्स (प्राइवेट हाइब्रिड) | 125 – 130 दिन | 41 – 42% | 26 से 30 क्विंटल |
| गिरिराज (DRMRIJ-31) | सरसों अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DRMR) | 130 – 138 दिन | 41.5% | 27 से 31 क्विंटल |
1. RH 725: लंबे तने और बंपर फलियों वाली लोकप्रिय किस्म
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हिसार) द्वारा विकसित RH 725 किस्म पिछले दो-तीन सालों में किसानों की पहली पसंद बनकर उभरी है। यह किस्म मध्य प्रदेश के चंबल, मालवा और नर्मदापुरम संभाग के साथ-साथ राजस्थान व हरियाणा के सिंचित क्षेत्रों के लिए बहुत उपयुक्त है।
- फलियों में दाने: इस किस्म की मुख्य विशेषता इसकी फलियों की लंबाई है। एक फली में औसतन 18 से 22 दाने बैठते हैं और दाने मोटे व चमकदार काले-भूरे रंग के होते हैं।
- सूखा व पाला सहने की क्षमता: इसमें पौधों की शाखाएं नीचे से ही निकलना शुरू होती हैं, जिससे पौधों का फैलाव बहुत अच्छा होता है। यह हल्की ठंड और पाले को आसानी से सहन कर लेती है।
- पैदावार: अगर समय पर दो पानी मिल जाएं, तो यह किस्म प्रति बीघा 10 से 12 क्विंटल (लगभग 25-28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) का उत्पादन देती है।
2. पायनियर 45S46: सबसे ज्यादा तेल प्रतिशत और मजबूत तना
अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी का प्रमाणित हाइब्रिड बीज बोना चाहते हैं, तो पायनियर 45S46 सबसे भरोसेमंद किस्मों में गिनी जाती है। मंडियों में व्यापारी जब सरसों खरीदते हैं, तो जिस ढेरी में तेल की मात्रा ज्यादा निकलती है, उसका भाव 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक ज्यादा मिलता है।
- तेल की मात्रा: इस हाइब्रिड में तेल की मात्रा 41% से लेकर 42% तक पाई जाती है, जो सामान्य देसी या पुरानी किस्मों से 3-4% अधिक है।
- तना नहीं झुकता: कई बार दिसंबर-जनवरी में तेज हवा या हल्की बारिश से सरसों की फसल आड़ी गिर जाती है। पायनियर 45S46 का तना काफी मोटा और मजबूत होता है, जिससे फसल जमीन पर नहीं गिरती।
- पकने की अवधि: यह मध्यम अवधि (125 से 130 दिन) में पककर तैयार हो जाती है, जिससे गेहूं या चने की पछेती कटाई के बाद खेत जल्दी खाली हो जाता है।
3. गिरिराज (DRMRIJ-31): रोग प्रतिरोधी और भारी पैदावार
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DRMR), भरतपुर द्वारा तैयार की गई गिरिराज किस्म उन क्षेत्रों के लिए वरदान है जहाँ सफेद रोली (White Rust) या तना गलन रोग का प्रकोप ज्यादा रहता है।
- रोगों से सुरक्षा: यह किस्म सफेद फफूंद (छाछिया/रोली) के प्रति अत्यधिक सहनशील है। इस वजह से पत्तियों और फलियों पर फफूंद की बीमारी नहीं लगती और पौधा अंत तक हरा-भरा रहता है।
- कम सिंचाई में भी कामयाब: इसे पूरे सीजन में केवल 2 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। यदि आपके पास ट्यूबवेल या नहर का पानी सीमित है, तो यह किस्म कम पानी में भी 27 से 31 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार निकालने की क्षमता रखती है।
- दाना: 1000 दानों का वजन लगभग 5.5 से 6 ग्राम होता है, जिससे मंडी में वजन भारी बैठता है।
सरसों बुवाई के 4 जरूरी नियम: जो पैदावार 25% तक बढ़ा देंगे
1. बीज दर और बीजोपचार
हाइब्रिड सरसों की बुवाई में कभी भी जरूरत से ज्यादा बीज न डालें। प्रति एकड़ 1.5 से 2 किलोग्राम (या प्रति बीघा 1 से 1.25 किलोग्राम) बीज पर्याप्त होता है। बुवाई से पहले बीज को ट्राइकोडर्मा विरिडी (5 ग्राम प्रति किलो बीज) या कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम प्रति किलो बीज) से उपचारित अवश्य करें ताकि उकठा (विल्ट) रोग न लगे।
2. DAP की जगह सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) को प्राथमिकता दें
सरसों एक तिलहनी फसल है और तिलहन को फास्फोरस के साथ-साथ सल्फर की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। यदि आप केवल DAP डालते हैं, तो पौधे को नाइट्रोजन और फास्फोरस तो मिल जाता है लेकिन सल्फर नहीं मिलता। इसकी जगह बुवाई के समय 3 बोरी सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) प्रति हेक्टेयर डालें, जिससे 16% फास्फोरस के साथ 11% सल्फर और 19% कैल्शियम मुफ्त में मिल जाता है।
यदि आप DAP ही डाल रहे हैं, तो प्रति बीघा 8 से 10 किलोग्राम बेंटोनाइट सल्फर (90%) बुवाई के समय कतारों में जरूर दें। बिना सल्फर के सरसों के दानों में तेल का जमाव अधूरा रह जाता है।
3. कतार से कतार की सही दूरी
हाइब्रिड सरसों में फुटाव ज्यादा होता है, इसलिए बीज छिड़कने के बजाय सीड ड्रिल से कतारों में बोएं। कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर (डेढ़ फीट) और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखें। जब पौधे 15-20 दिन के हो जाएं, तो घने पौधों को उखाड़कर छांट (Thining) दें।
4. कम पानी में सिंचाई का सटीक समय
- पहली सिंचाई: बुवाई के 30 से 35 दिन बाद, जब शाखाएं निकल रही हों और फूल आने की शुरुआत हो रही हो। इस पानी के साथ प्रति बीघा 25 से 30 किलो यूरिया का छिड़काव करें।
- दूसरी सिंचाई: बुवाई के 65 से 75 दिन बाद, जब फलियों में दाना भर रहा हो (दूधिया अवस्था)। ध्यान रहे कि जब फूल पूरे खिले हों, उस समय तेज पानी देने से बचें ताकि फूल झड़ें नहीं।
किसान भाई इन किस्मों के प्रमाणित बीज अपने नजदीकी कृषि सेवा केंद्र, किसान समृद्धि केंद्र या राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) से ही खरीदें और पक्का बिल अवश्य लें। वैज्ञानिक तकनीक से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए किसान भाई राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DRMR) के आधिकारिक पोर्टल पर संपर्क कर सकते हैं।
