देश में यूरिया की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार चाहती है कि भारत को ज्यादा से ज्यादा यूरिया अपने ही देश में बनाना चाहिए, ताकि बाहर से कम मंगाना पड़े। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने राष्ट्रीय निवेश नीति यूरिया-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दे दी है।
सरकार का कहना है कि इस नई नीति से देश में नई गैस आधारित यूरिया फैक्ट्रियां लगाने का रास्ता आसान होगा। अगर ऐसा होता है तो आने वाले समय में यूरिया का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों तक इसकी उपलब्धता भी पहले से बेहतर हो सकती है।
NIPU-2026 क्या है?
NIPU-2026 यानी National Investment Policy for Urea-2026। आसान भाषा में समझें तो यह सरकार की नई निवेश नीति है, जिसके जरिए निजी और सरकारी दोनों कंपनियों को नई यूरिया फैक्ट्रियां लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
सरकार का मकसद साफ है। देश में ज्यादा यूरिया बने, आयात कम करना पड़े और भविष्य में किसानों को जरूरत के समय यूरिया की कमी का सामना न करना पड़े।
नई नीति में क्या-क्या खास है?
सरकार ने इस नीति में कुछ नए प्रावधान जोड़े हैं, जिनसे निवेश करना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है।
मुख्य बातें इस प्रकार हैं—
- नई गैस आधारित यूरिया उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा दिया जाएगा।
- फिक्स्ड कॉस्ट और वेरिएबल कॉस्ट अलग-अलग तय की जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी रहेगी।
- निवेश करने वाली कंपनियों को 12 प्रतिशत से 16 प्रतिशत तक Return on Equity (ROE) का प्रावधान दिया गया है।
- विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का असर कम करने के लिए चार साल बाद फिक्स्ड कॉस्ट को भारतीय रुपये में बदला जाएगा।
- सरकार का अनुमान है कि हर नए प्लांट पर 250 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हो सकती है।
किसानों को क्या फायदा होगा?
इस नीति का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है।
अगर देश में यूरिया का उत्पादन बढ़ता है तो—
- यूरिया की उपलब्धता बेहतर होगी।
- विदेशों से आयात पर निर्भरता कम होगी।
- जरूरत के समय किसानों तक यूरिया पहुंचाना आसान होगा।
- उर्वरक की सप्लाई पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है।
- खेती के लिए समय पर खाद मिलने में मदद मिलेगी।
पहले भी लाई गई थी ऐसी नीति
इससे पहले साल 2012 में सरकार ने National Investment Policy (NIP-2012) लागू की थी।
उस नीति के तहत—
- देश में 6 नई यूरिया उत्पादन इकाइयां स्थापित की गईं।
- इनमें 4 संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) और 2 निजी क्षेत्र की इकाइयां शामिल थीं।
- इस योजना के तहत निवेश की अवधि अक्टूबर 2019 में पूरी हो गई थी।
अब उसी के बाद सरकार NIPU-2026 लेकर आई है।
अभी देश में कितनी यूरिया बनती है?
उर्वरक विभाग के अनुसार इस समय देश में—
- 33 यूरिया उत्पादन इकाइयां काम कर रही हैं।
- इनकी कुल स्थापित और पुनर्मूल्यांकित उत्पादन क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन (LMT) है।
इसके बावजूद देश की पूरी जरूरत घरेलू उत्पादन से पूरी नहीं हो पाती। यही वजह है कि भारत को अभी भी कुछ मात्रा में यूरिया विदेशों से आयात करना पड़ता है।
नई फैक्ट्रियों को मिलेगा बढ़ावा
उर्वरक विभाग को नई गैस आधारित यूरिया फैक्ट्रियां लगाने के लिए कई प्रस्ताव मिले हैं। इन्हीं प्रस्तावों को ध्यान में रखते हुए NIPU-2026 तैयार की गई है।
सरकार को उम्मीद है कि नई नीति लागू होने के बाद निवेश की रफ्तार बढ़ेगी और देश में आधुनिक यूरिया उत्पादन संयंत्र स्थापित होंगे। इससे उत्पादन भी बढ़ेगा और आयात पर होने वाला खर्च भी कम करने में मदद मिलेगी।
NIPU-2026 का उद्देश्य सिर्फ नई फैक्ट्रियां लगवाना नहीं है। सरकार चाहती है कि भारत उर्वरक के मामले में और मजबूत बने, आयात पर खर्च कम हो और किसानों को समय पर यूरिया मिलता रहे।
अब देखना होगा कि इस नीति के बाद नई परियोजनाओं पर कितनी तेजी से काम शुरू होता है। अगर योजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो आने वाले वर्षों में इसका फायदा किसानों के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है।
सवाल-जवाब (FAQs)
प्रश्न: NIPU-2026 क्या है?
उत्तर: यह केंद्र सरकार की नई निवेश नीति है, जिसके तहत देश में नई गैस आधारित यूरिया उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रश्न: इस नीति को किसने मंजूरी दी?
उत्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने इसे मंजूरी दी है।
प्रश्न: किसानों को इससे क्या फायदा होगा?
उत्तर: यूरिया की उपलब्धता बेहतर हो सकती है, आयात पर निर्भरता कम होगी और समय पर खाद मिलने में मदद मिलेगी।
प्रश्न: भारत में अभी कितनी यूरिया उत्पादन इकाइयां हैं?
उत्तर: फिलहाल देश में 33 यूरिया उत्पादन इकाइयां संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन (LMT) है।
