रबी सीजन की बुवाई जोर पकड़ते ही सोसायटियों और खाद दुकानों पर यूरिया व डीएपी के लिए किसानों की लंबी कतारें लगना शुरू हो जाती हैं। 45-50 किलो के भारी-भरकम कट्टे ढोने की मशक्कत, कालाबाजारी की मार और खेत में बिखेरने के बाद भी ज्यादातर खाद जमीन में बेकार बह जाने का नुकसान हर किसान झेलता है। इसी परेशानी को दूर करने और खेती की लागत आधी करने के लिए कृषि विभाग ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तरल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव पर 50 प्रतिशत तक सरकारी सब्सिडी देने का ऐलान किया है।
सब्सिडी में किसान को कितना पैसा मिलेगा?
कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार नैनो उर्वरकों के खेत में छिड़काव पर कुल लागत का 50 फीसदी हिस्सा सरकार अनुदान के तौर पर वहन कर रही है। इसमें दोनों खादों के लिए अलग-अलग सीमा तय की गई है:
| उर्वरक का नाम | अनुदान दर (सब्सिडी) | अधिकतम सीमा (प्रति हेक्टेयर) |
|---|---|---|
| नैनो यूरिया (तरल) | लागत का 50% | अधिकतम ₹1,000 प्रति हेक्टेयर |
| नैनो डीएपी (तरल) | लागत का 50% | अधिकतम ₹1,450 प्रति हेक्टेयर |
किन-किन फसलों पर मिलेगा इसका फायदा?
चालू रबी सीजन में क्षेत्र की प्रमुख फसलों को इस योजना के दायरे में रखा गया है। इसमें गेहूं, जौ, सरसों, चना और जीरा की खेती करने वाले काश्तकारों को प्राथमिकता दी जा रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसान बुवाई और बढ़वार के समय बोरी वाली रासायनिक खाद पर अपनी निर्भरता घटाकर तरल नैनो खाद अपनाएं।
दानेदार कट्टे से कितनी बेहतर है नैनो यूरिया?
खेत में जब दानेदार यूरिया का छिड़काव किया जाता है, तो उसमें मौजूद नाइट्रोजन का केवल 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा ही पौधों की जड़ों तक पहुंच पाता है। बाकी नाइट्रोजन या तो धूप और हवा में उड़ जाती है या फिर सिंचाई के पानी के साथ जमीन के बहुत नीचे रिस जाती है।
इसके उलट नैनो यूरिया को पानी में घोलकर सीधे पत्तियों पर स्प्रे किया जाता है। पत्तियों के रंध्र (स्टोमेटा) इसे तुरंत सोख लेते हैं, जिससे इसकी उपयोग दक्षता 80 से 90 प्रतिशत तक बैठती है। इसके अलावा 500 मिलीलीटर की एक छोटी बोतल 45 किलो की भारी बोरी के बराबर काम करती है, जिसे किसान आराम से थैले या मोटरसाइकिल पर रखकर घर ला सकते हैं।
छिड़काव का सही समय और तरीका
फसल पर बेहतर परिणाम लेने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने छिड़काव का सही समय तय किया है:
- पहला छिड़काव: गेहूं या अन्य फसलों में कल्ले (फुटाव) निकलते समय, यानी बुवाई के लगभग 30 से 35 दिन बाद।
- दूसरा छिड़काव: फसल में फूल आने से ठीक एक सप्ताह पहले।
- घोल की मात्रा: 1 लीटर साफ पानी में 2 से 4 मिलीलीटर नैनो यूरिया मिलाकर पत्तियों पर बारीक फुहार के रूप में स्प्रे करें। छिड़काव हमेशा सुबह ओस सूखने के बाद या दोपहर बाद धूप हल्की होने पर ही करें।
अनुदान पाने के लिए क्लस्टर नियम व पात्रता
इस योजना में व्यक्तिगत एकल किसानों की जगह क्लस्टर प्रदर्शन को प्राथमिकता दी गई है:
- कम से कम 10 किसानों का समूह (क्लस्टर) बनाकर इस प्रदर्शन कार्यक्रम में हिस्सा लिया जा सकता है।
- खेत में छिड़काव स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक (Agriculture Supervisor) या सहायक कृषि अधिकारी की निगरानी में कराया जाता है।
- छिड़काव के समय खेत की जियो-टैगिंग और फोटो सत्यापन किया जाता है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो।
- सत्यापन पूरा होते ही सब्सिडी की रकम सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में डीबीटी के जरिए ट्रांसफर कर दी जाती है।
आवेदन कैसे करें और कौन-से दस्तावेज चाहिए?
योजना का लाभ लेने के लिए किसान राजस्थान सरकार के आधिकारिक पोर्टल राजकिसान साथी पोर्टल पर अपनी एसएसओ आईडी (SSO ID) के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर भी फॉर्म भरा जा सकता है।
जरूरी दस्तावेज:
- जन आधार कार्ड या आधार कार्ड
- जमीन की नकल यानी जमाबंदी (खसरा-खतौनी)
- बैंक पासबुक की कॉपी
- मोबाइल नंबर जो आधार और जन आधार से लिंक हो
यदि ऑनलाइन आवेदन में कोई तकनीकी दिक्कत आए, तो किसान अपने ग्राम पंचायत स्तर के कृषि पर्यवेक्षक या ब्लॉक कृषि कार्यालय में जाकर क्लस्टर प्रदर्शन सूची में अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं।
