मध्य प्रदेश के किसान भाइयों के लिए रबी और खरीफ के इस संधिकाल में राहत भरी बड़ी खबर आई है। प्रदेशभर की कृषि उपज मंडियों में इन दिनों सोयाबीन और मक्का की भारी आवक हो रही है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश और कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना की अगुवाई में राज्य के सभी संभागों में अवकाश के दिनों में भी मंडियां खुली रखने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है।
मंडियों में छुट्टियों के दिन भी होगी सोयाबीन और मक्का की नीलामी
खरीफ सीजन की मुख्य नकदी फसल सोयाबीन की कटाई और गहाई पूरी होते ही किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं। साथ ही मक्का उत्पादक जिलों (जैसे छिंदवाड़ा, बैतूल, धार, खरगोन) में भी मक्का की भारी आवक शुरू हो चुकी है। आमतौर पर रविवार और त्योहारों की छुट्टियों में मंडियों में नीलामी कार्य बंद रहता था, जिससे शुक्रवार या शनिवार को पहुंचे किसानों को कई दिनों तक मंडी प्रांगण में ही अपनी ट्रॉलियों के साथ इंतजार करना पड़ता था।
शासन के नए आदेश के अनुसार जब तक मंडियों में फसलों की बंपर आवक का दबाव बना हुआ है, तब तक रविवार और अन्य अवकाश दिवसों में भी मंडी प्रांगण एवं उप-मंडी प्रांगणों में नीलामी शेड और खरीद कार्य सुचारू रूप से संचालित रहेगा, ताकि किसान उसी दिन अपनी उपज बेचकर बिना किसी आर्थिक व व्यावहारिक असुविधा के समय पर भुगतान प्राप्त कर सकें।
मंडी बोर्ड और संयुक्त निदेशकों को मिले सख्त प्रशासनिक निर्देश
मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी बोर्ड) के सभी संयुक्त संचालकों (Joint Directors) को फील्ड स्तर पर निम्नलिखित पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं:
- व्यापारियों के साथ बैठक व समन्वय: प्रत्येक मंडी समिति अपने क्षेत्र के अनुज्ञप्तिधारी (लाइसेंसधारी) व्यापारियों और आढ़तियों के साथ तत्काल बैठक कर अवकाश के दिनों में भी नीलामी में उनकी अनिवार्य सहभागिता सुनिश्चित करेगी।
- उप-मंडी प्रांगणों का संचालन: केवल मुख्य मंडी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी उप-मंडियों में भी तुलाई कांटे और शेड पूरी क्षमता से चालू रहेंगे।
- तुलाई और हम्माली की सुदृढ़ व्यवस्था: छुट्टियों के दिन तुलाई कांटे बंद न रहें और पर्याप्त हम्मालों की तैनाती की जाए, जिससे ट्रॉलियों को खाली कराने में अनावश्यक विलंब न हो।
- त्वरित भुगतान: नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों को उनकी कृषि उपज का भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर सीधे उनके बैंक खाते या नियमानुसार नकद उपलब्ध कराया जाए।
- किसान सुविधाएं: मंडी प्रांगण में किसानों की गाड़ियों के सुगम आवागमन, पेयजल और रात्रि विश्राम की समुचित व्यवस्था हर समय तैयार रहेगी।
जिलेवार मंडियों में तुलाई और नीलामी की स्थिति
मालवा, निमाड़, महाकौशल और मध्य भारत के प्रमुख जिलों की मंडियों में इस व्यवस्था को तुरंत लागू किया गया है:
| प्रमुख संभाग / जिला | मुख्य आवक वाली फसल | मंडी व्यवस्था |
|---|---|---|
| इंदौर, उज्जैन, देवास, धार | पीला सोयाबीन, डॉलर चना | रविवार व अवकाश पर नियमित नीलामी शेड चालू |
| छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी | मक्का, सोयाबीन | अतिरिक्त तुलाई कांटे और उप-मंडियों में लगातार खरीद |
| हरदा, सीहोर, होशंगाबाद (नर्मदापुरम) | सोयाबीन, धान, मूंग | गेट एंट्री 24 घंटे और अवकाश में लगातार नीलामी |
| नीमच, मंदसौर, रतलाम | सोयाबीन, लहसुन, मक्का | भीड़ नियंत्रण और निरंतर तौल पर्ची वितरण |
मंडी जाने से पहले किसान भाई इन 4 बातों का रखें ध्यान
अपनी उपज का सही और अधिकतम भाव पाने के लिए किसान भाइयों को मंडी रवाना होने से पहले कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- नमी (Moisture) की जांच: फसल को अच्छी तरह धूप में सुखाकर और छानकर लाएं। 10 से 12 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर व्यापारी भाव में कटौती करते हैं। साफ-सुथरी और ग्रेडिंग की हुई फसल पर 150 से 250 रुपये प्रति क्विंटल तक बेहतर दाम मिलते हैं।
- दस्तावेज साथ रखें: आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी और जमीन की बही (खसरा नकल) अपने साथ जरूर रखें, ताकि भुगतान प्रक्रिया में कोई अड़चन न आए।
- मंडी गेट पर्ची: मंडी में प्रवेश करते समय मुख्य द्वार पर मिलने वाली अधिकृत प्रवेश पर्ची अवश्य लें। उस पर अपना नाम, वाहन नंबर और फसल की सही मात्रा दर्ज कराएं।
- e-NAM पोर्टल पर भाव जांचें: राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM पोर्टल) या राज्य कृषि विभाग के पोर्टल (mpkrishi.mp.gov.in) पर अपने जिले की मंडी के ताज़ा मॉडल भाव पहले ही देख लें, ताकि बोली के दौरान आपको सही रेट की स्पष्ट जानकारी रहे।
मंडियों के निरंतर खुले रहने से किसानों को न केवल अपनी उपज समय पर बेचने का अवसर मिलेगा, बल्कि आगामी रबी बुवाई (गेहूं, चना, सरसों) के लिए समय पर खाद-बीज खरीदने हेतु नकद राशि भी जल्दी मिल सकेगी।
