MP Fasal Bima: 16.70 लाख किसानों को मिले ₹317 करोड़

मध्य प्रदेश के उन किसान भाइयों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है जिनकी फसलें पिछले मौसम में अतिवृष्टि, कीट प्रकोप या मौसम की मार के कारण खराब हुई थीं। प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 16.70 लाख (16 लाख 70 हजार) पात्र किसानों के बैंक खातों में 317.86 करोड़ रुपये की बीमा क्लेम राशि सीधे ट्रांसफर कर दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले के सरदारपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान सिंगल क्लिक के जरिए यह राशि सीधे किसानों के आधार लिंक बैंक खातों में भेजी। इसके साथ ही क्षेत्र के किसानों के लिए 2,387.60 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं की भी शुरुआत की गई है, जिससे आने वाले रबी सीजन में सिंचाई का संकट दूर होगा।

मध्य प्रदेश फसल बीमा वितरण की मुख्य जानकारी

विवरणआधिकारिक जानकारी
योजना का नामप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (मध्य प्रदेश)
कुल वितरित बीमा राशि₹317.86 करोड़
लाभार्थी किसानों की संख्यालगभग 16.70 लाख पात्र किसान
कार्यक्रम का स्थानसरदारपुर, जिला धार (मध्य प्रदेश)
भुगतान का माध्यमआधार बेस्ड डीबीटी (सीधे बैंक खाते में)
सिंचाई परियोजना सौगात₹2,387.60 करोड़
आधिकारिक बीमा पोर्टलpmfby.gov.in

किन किसानों को मिला फसल बीमा का लाभ

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह राशि उन किसानों को दी गई है जिनके खेतों में फसल कटाई प्रयोग (CCE – Crop Cutting Experiments) के आधार पर वास्तविक नुकसान तय मानकों से अधिक पाया गया था। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित किसान शामिल हैं:

  • जिन किसान भाइयों ने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (पैक्स सोसायटी) या बैंक शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए फसल बीमा का प्रीमियम कटवाया था।
  • गैर-ऋणी किसान जिन्होंने सीएससी (CSC) या एमपी ऑनलाइन के माध्यम से स्वयं अपनी खरीफ/रबी फसलों का प्रीमियम जमा किया था।
  • जिन किसानों का आधार नंबर उनके बैंक खाते से एनपीसीआई (NPCI) डीबीटी के लिए सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।

मोबाइल से फसल बीमा क्लेम स्टेटस कैसे चेक करें

अगर आप यह जांचना चाहते हैं कि आपके खाते में फसल बीमा का पैसा आया है या नहीं, तो आप तीन आसान तरीकों से स्थिति जान सकते हैं:

1. बैंक पासबुक या मोबाइल एसएमएस द्वारा

चूंकि सरकार ने पैसा सीधे डीबीटी के जरिए भेजा है, इसलिए सबसे पहले अपने उस बैंक खाते का एसएमएस अलर्ट चेक करें जो आधार से जुड़ा है। आप अपनी बैंक शाखा या कियोस्क सेंटर पर जाकर पासबुक में एंट्री कराकर भी देख सकते हैं। उसमें क्रेडिट विवरण में ‘PMFBY DBT’ या ‘State Govt Claim’ लिखा दिखाई देगा।

2. पीएम फसल बीमा पोर्टल से ऑनलाइन स्टेटस

आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने आवेदन की स्थिति स्वयं जांच सकते हैं:

  1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmfby.gov.in पर जाएं।
  2. होमपेज पर Application Status के विकल्प पर क्लिक करें।
  3. अपना रसीद नंबर या पॉलिसी एप्लीकेशन नंबर दर्ज करें।
  4. स्क्रीन पर दिया गया कैप्चा कोड डालकर Check Status पर क्लिक करें।
  5. यदि आपका क्लेम पास हो चुका है, तो वहां स्वीकृत राशि और बैंक खाते का विवरण दिख जाएगा।
महत्वपूर्ण बात: कई बार बीमा राशि बैंक खाते में तो आ जाती है लेकिन केसीसी खाते में पुराना कर्ज होने के कारण बैंक उसे ऋण खाते में समायोजित (Adjust) कर लेता है। इसलिए अपने बचत खाते के साथ-साथ केसीसी ऋण खाते का स्टेटमेंट भी जरूर चेक करें।

खाते में पैसा न आने पर तुरंत क्या करें

यदि आपके गांव या आसपास के अन्य किसानों को बीमा क्लेम मिल गया है लेकिन आपका पैसा अभी तक नहीं पहुंचा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

  • आधार बैंक मैपिंग जांचें: कई बार बैंक खाते में आधार लिंक तो होता है लेकिन डीबीटी (NPCI) चालू नहीं होता। अपनी बैंक शाखा में जाकर आधार सीडिंग फॉर्म दोबारा जमा करें।
  • समिति या बैंक से पॉलिसी नंबर लें: जिस बैंक या सोसायटी से केसीसी का बीमा कटा था, वहां जाकर अपने पटवारी हल्के की क्लेम सूची और अपना पॉलिसी नंबर पता करें।
  • स्थानीय कृषि अधिकारी से संपर्क: अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) या विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) कार्यालय में जाकर अपने पटवारी हल्के के नुकसान का प्रतिशत जानें।

फसल बीमा आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर

फसल बीमा से जुड़ी किसी भी शिकायत या पूछताछ के लिए किसान सीधे टोल-फ्री हेल्पलाइन पर बात कर सकते हैं:

  • पीएम फसल बीमा राष्ट्रीय टोल-फ्री नंबर: 14447
  • किसान कॉल सेंटर (KCC): 1800-180-1551
  • आधिकारिक पोर्टल: pmfby.gov.in

राहुल पटेल एक स्वतंत्र कृषि विश्लेषक, मंडी शोधकर्ता और mKisan के मुख्य लेखक हैं। वे मध्य प्रदेश से हैं और पिछले 6 वर्षों से भारतीय कृषि बाजार, Agmarknet सरकारी मंडी दरों और NECC अंडा भावों का गहन अध्ययन व विश्लेषण कर रहे हैं। उनका उद्देश्य भारतीय किसानों और व्यापारियों तक निष्पक्ष, पारदर्शी और सत्यापित कृषि आंकड़े सरल हिंदी भाषा में पहुंचाना है।