नरवाई न जलाएं, बनाएं जैविक खाद: पराली प्रबंधन के 4 उपाय

खरीफ सीजन में सोयाबीन, मक्का, धान, उड़द और मूंग की कटाई के बाद खेतों में भारी मात्रा में फसल अवशेष (नरवाई या पराली) बचते हैं। अक्सर अगली रबी फसल की बुवाई की जल्दबाजी में किसान भाई इस नरवाई में आग लगा देते हैं। नरवाई में आग लगाने से न केवल पर्यावरण में जहरीला धुआं फैलता है, बल्कि जमीन की उपजाऊ ऊपरी परत जल जाती है और मिट्टी के मित्र कीट व जैविक जीवाणु खत्म हो जाते हैं।

कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग की सलाह है कि किसान फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उन्हें जैविक खाद में बदलें। इससे खेत का जैविक कार्बन (Organic Carbon) बढ़ता है, रासायनिक खाद जैसे डीएपी और यूरिया की खपत घटती है, और रबी फसलों में अधिक उत्पादन मिलता है। आइए जानते हैं नरवाई प्रबंधन के 4 सबसे कारगर तरीके और इस पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का पूरा विवरण।

नरवाई जलाने से मिट्टी को होने वाले बड़े नुकसान

खेत में आग लगाने से तात्कालिक रूप से खेत साफ जरूर दिखता है, लेकिन इसका सीधा असर आपकी जेब और जमीन पर पड़ता है:

  • मिट्टी की उर्वरा शक्ति में गिरावट: पराली जलाने से खेत की ऊपरी सतह का तापमान सैकड़ों डिग्री तक पहुंच जाता है, जिससे मिट्टी में मौजूद केंचुए और मित्र फफूंद नष्ट हो जाते हैं।
  • पोषक तत्वों की बर्बादी: एक टन फसल अवशेष जलने पर लगभग 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फास्फोरस, 25 किलो पोटाश और 1.2 किलो सल्फर जलकर राख हो जाता है।
  • पानी सोखने की क्षमता में कमी: जैविक अवशेष नष्ट होने से जमीन सख्त हो जाती है और मिट्टी की नमी सोखने की ताकत कम हो जाती है।

पराली व नरवाई को खाद में बदलने के 4 वैज्ञानिक उपाय

1. गड्ढा बनाकर कम्पोस्ट खाद तैयार करना

सोयाबीन, मक्का और दालों की कटाई के बाद बचे डंठलों को एक जगह इकट्ठा करके 3 से 4 फीट गहरे गड्ढे में डालें। इसके ऊपर गोबर का घोल, वेस्ट डीकंपोजर और थोड़ा पानी छिड़क दें। 40 से 50 दिनों में यह अवशेष सड़कर उत्तम दर्जे की जैविक कम्पोस्ट खाद में बदल जाते हैं, जिसे अगली फसल में डाला जा सकता है। इसके अलावा, मक्का और सोयाबीन के साफ अवशेषों को नजदीकी गौशालाओं में चारे के रूप में भी दिया जा सकता है।

2. स्ट्रॉ रीपर और एसएमएस युक्त हार्वेस्टर का उपयोग

फसल की कटाई के समय साधारण हार्वेस्टर के बजाय एसएमएस (Straw Management System) लगे कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग करें। यह सिस्टम कटाई के साथ ही पराली को बारीक टुकड़ों में काटकर पूरे खेत में एकसमान रूप से बिखेर देता है। इसके बाद रोटावेटर चलाकर इसे मिट्टी में मिला दिया जाए, तो पहली सिंचाई के बाद यह अवशेष तेजी से गलकर खाद बन जाते हैं।

3. सुपर सीडर और हैप्पी सीडर से बिना जुताई सीधी बोनी

रबी फसलों जैसे गेहूं, चना और सरसों की बोनी के लिए अब खेत से नरवाई निकालने या जलाने की जरूरत नहीं है। किसान भाई सुपर सीडर, हैप्पी सीडर या स्मार्ट सीडर का उपयोग कर सकते हैं। यह मशीन खड़ी नरवाई को काटकर बारीक करती है, उसे मिट्टी में मिलाती है और उसी समय खाद व बीज की सटीक गहराई पर बुवाई कर देती है। इससे जुताई का डीजल और समय दोनों बचते हैं।

4. बेलर मशीन से बनाएं गांठें और कमाएं मुनाफा

जिन क्षेत्रों में बायोमास प्लांट, गत्ता फैक्ट्रियां या बड़ी गौशालाएं हैं, वहां किसान बेलर मशीन का उपयोग कर सकते हैं। बेलर मशीन खेत में बिखरी पराली को दबाकर 20 से 30 किलो की मजबूत गांठें (Bales) बना देती है। इन गांठों को फैक्ट्रियों और डेयरियों में ₹150 से ₹250 प्रति क्विंटल तक आसानी से बेचा जा सकता है। इससे खेत भी साफ हो जाता है और किसानों को अतिरिक्त कमाई भी होती है।

नरवाई प्रबंधन यंत्रों की तुलना और लागत

कृषि यंत्रमुख्य कार्यट्रैक्टर क्षमताकिसानों को मुख्य फायदा
सुपर सीडरनरवाई की कटाई, मिलावट और बोनी एक साथ50 से 65 एचपीअलग से जुताई का खर्च शून्य, समय की बचत
एसएमएस (SMS)हार्वेस्टर के पीछे लगकर पराली को बारीक काटनाकंबाइन हार्वेस्टर संलग्नखेत में पराली का एकसमान फैलाव, मिट्टी सुधार
बेलर मशीनपराली को इकट्ठा कर चौकोर गांठें बनाना45 से 55 एचपीगांठें बेचकर नकदी मुनाफा, चारा भंडारण
हैप्पी सीडरखड़ी पराली के बीच गेहूं की सीधी बिजाई45 से 50 एचपीकम लागत, खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण

एसएमएस यंत्र पर 50% सरकारी सब्सिडी: ऐसे करें आवेदन

मध्य प्रदेश शासन द्वारा कंबाइन हार्वेस्टर धारक किसानों के लिए स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) लगाने पर भारी अनुदान दिया जा रहा है:

  • अनुमानित लागत: एसएमएस यंत्र की औसत कीमत लगभग ₹1,20,000 है।
  • सब्सिडी राशि: कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान (अधिकतम ₹60,000) दिया जा रहा है।
  • आवेदन की अंतिम तिथि: इच्छुक हार्वेस्टर मालिक 29 अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद लॉटरी के माध्यम से चयनित आवेदकों की सूची जारी होगी।
  • आधिकारिक पोर्टल: किसान भाई अपने नजदीकी एमपी ऑनलाइन या सीएससी केंद्र से मध्य प्रदेश कृषि यंत्र डीबीटी पोर्टल dbt.mpdage.org पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या नरवाई को मिट्टी में मिलाने से दीमक या कीट बढ़ते हैं?

नहीं, यदि आप नरवाई को मिट्टी में मिलाने के बाद खेत में वेस्ट डीकंपोजर या ट्राइकोडर्मा का छिड़काव करते हैं, तो अवशेष बहुत तेजी से गलकर खाद बन जाते हैं। इससे मिट्टी की जैविक गुणवत्ता बढ़ती है और हानिकारक कीटों का प्रकोप नहीं होता।

2. सुपर सीडर से गेहूं बोने पर पैदावार पर क्या असर पड़ता है?

सुपर सीडर से बोने पर बीज उचित गहराई और नमी में गिरता है। फसल अवशेष जमीन पर पलवार (मल्च) का काम करते हैं, जिससे सर्दियों में नमी बनी रहती है और खरपतवार नहीं उगते। सामान्य बुवाई की तुलना में 1 से 2 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार अधिक मिलती है।

3. एसएमएस सब्सिडी के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?

आवेदन के लिए किसान या हार्वेस्टर धारक का आधार कार्ड, बैंक पासबुक, कंबाइन हार्वेस्टर की आरसी (पंजीयन प्रमाण पत्र), खसरा-खतौनी की नकल और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होती है।

राहुल पटेल एक स्वतंत्र कृषि विश्लेषक, मंडी शोधकर्ता और mKisan के मुख्य लेखक हैं। वे मध्य प्रदेश से हैं और पिछले 6 वर्षों से भारतीय कृषि बाजार, Agmarknet सरकारी मंडी दरों और NECC अंडा भावों का गहन अध्ययन व विश्लेषण कर रहे हैं। उनका उद्देश्य भारतीय किसानों और व्यापारियों तक निष्पक्ष, पारदर्शी और सत्यापित कृषि आंकड़े सरल हिंदी भाषा में पहुंचाना है।