किसान भाइयों, क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा जीव जो तालाब और पानी में दिखता है, वह आपकी खेती का खर्च कम कर सकता है और साथ ही लोगों की थाली में सुपरफूड बनकर भी पहुंच रहा है? इस जीव का नाम है ब्लू-ग्रीन एल्गी (Blue-Green Algae)। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI पूसा) के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुनील पब्बी ने ‘किसान तक’ के पॉडकास्ट अन्नगाथा (Annagatha) में इसके बारे में बड़ी दिलचस्प जानकारी दी है।
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ब्लू-ग्रीन एल्गी क्या है?
ब्लू-ग्रीन एल्गी एक बहुत ही छोटा सूक्ष्म जीव (Microorganism) है जो पानी में पाया जाता है। डॉ. पब्बी के अनुसार, यह हवा में मौजूद नाइट्रोजन गैस को पकड़कर उसे पौधों के लिए उपयोगी (खाद जैसा) बना देता है। यानी यह प्राकृतिक खाद की तरह काम करता है। इसकी वजह से किसानों को यूरिया जैसी रासायनिक खाद पर कम निर्भर रहना पड़ता है।
धान की खेती में कैसे बचाएगा एक बोरी यूरिया?
डॉ. पब्बी ने बताया कि धान (Rice) की खेती में ब्लू-ग्रीन एल्गी सबसे ज्यादा फायदेमंद है। अगर किसान इसे एक बार खेत में डाल दें, तो:
- यह पूरी फसल के दौरान लगातार काम करता रहता है
- लगभग 25-30 किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर जमीन को देता है
- इससे करीब एक बोरी यूरिया की बचत हो सकती है
इसके साथ ही यह मिट्टी में कार्बनिक तत्व (Organic Matter) भी बढ़ाता है, जिससे जमीन की उर्वरता और पानी रोकने की क्षमता सुधरती है। इसीलिए इसे जैव उर्वरक (Bio-Fertilizer) के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्पिरुलिना (Spirulina) — थाली में सुपरफूड
ब्लू-ग्रीन एल्गी की एक खास किस्म का नाम स्पिरुलिना (Spirulina) है, जिसे दुनियाभर में “सुपरफूड” माना जाता है। इसमें:
- 60 से 70 प्रतिशत तक प्रोटीन होता है
- शरीर के लिए जरूरी सभी अमीनो एसिड मिलते हैं
- विटामिन और आयरन भरपूर मात्रा में होता है
IARI पूसा के वैज्ञानिकों ने इस स्पिरुलिना से बिस्किट, चॉकलेट और पास्ता जैसे खाने की चीजें भी बनाई हैं। खासकर बच्चों में कुपोषण (Malnutrition) दूर करने में यह बहुत मददगार हो सकता है।
प्राकृतिक रंग भी बन रहे हैं इससे
डॉ. पब्बी ने एक और दिलचस्प बात बताई — ब्लू-ग्रीन एल्गी से प्राकृतिक रंग (Natural Colors) भी निकाले जा रहे हैं। इन रंगों का इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स (Cosmetics) में किया जा सकता है। इससे हानिकारक केमिकल रंगों की जरूरत कम होगी।
सावधानी जरूरी — हर काई (Algae) सही नहीं होती
डॉ. पब्बी ने एक जरूरी चेतावनी भी दी है कि हर तरह की काई फायदेमंद नहीं होती। कुछ प्रजातियां जैसे Microcystis जहरीली भी होती हैं। इसलिए किसान भाइयों को हमेशा वैज्ञानिक सलाह लेकर ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए। सही पहचान बहुत जरूरी है।
कुल मिलाकर, ब्लू-ग्रीन एल्गी किसानों के लिए एक सस्ता, प्राकृतिक और असरदार विकल्प बनकर उभर रहा है। सही तरीके से इस्तेमाल करेंगे तो खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी, और इंसानों को भी पोषण मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: ब्लू-ग्रीन एल्गी खेती में कैसे काम करता है?
Ans: यह हवा से नाइट्रोजन पकड़कर मिट्टी को देता है — जैसे प्राकृतिक खाद। इससे यूरिया का खर्च कम होता है। खासकर धान की खेती में एक बोरी तक यूरिया बच सकता है।
Q2: स्पिरुलिना क्या है और इसमें कितना प्रोटीन होता है?
Ans: स्पिरुलिना ब्लू-ग्रीन एल्गी की एक खास किस्म है जिसमें 60 से 70 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है। इसे सुपरफूड माना जाता है।
Q3: क्या हर तरह की एल्गी (काई) फायदेमंद होती है?
Ans: नहीं। कुछ प्रजातियां जैसे Microcystis जहरीली होती हैं। इसलिए हमेशा वैज्ञानिक सलाह लें और सही प्रजाति की पहचान करें।