ककड़ी की खेती में रखें इन बातों का विशेष ध्यान, होगा ज्यादा मुनाफा

आज हम इस पोस्ट मे जानेंगे की ककड़ी की आधुनिक तरीके से खेती कैसे की जाती है साथ ही ककड़ी की खेती में रखें इन बातों का विशेष ध्यान जिससे होगा आपको और ज्यादा मुनाफा :-

बुआई का समय

जायद में

बुआई का समय- 10 जनवरी से 31 मार्च के बीच

फसल अवधि- 90 से 100 दिन


तापमान , मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई

ककड़ी की खेती के लिए दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है । बीजों की बुवाई 20 डिग्री तापमान होने पर करे। अंकुरित होने के बाद इसके पौधों को बढ़ने के लिए 25 से 30 डिग्री तापमान की जरूरत की रहती है।

फसल के लिए चयन की गई भूमि का पी.एच मान 6.5 से 7.5 के बीच का होना चाहिए। फसल की बुवाई 20 दिन पहले मिट्टी पलटने वाले हल से 1 बार जुताई कर दे जिससे खेत में मौजूद खरपतवार और कीट नष्ट हो जाए।

बुवाई से पहले प्रति एकड़ खेत में 10 से 12 टन सड़ी हुई गोबर की खाद और 2.5 किलो ट्राईकोडर्मा डाले। खाद डालने के बाद खेत की 1 बार जुताई करके पाटा लगाकर पलेवा कर दे।

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उन्नत किस्में ( Varieties )

अर्का शीतल- अवधि 90 से 100 दिन इसका फल मध्म आकार के हरा रंग का फल लगता है । इसका फल 90 से 100 दिन में तैयार हो जाता है । इसकी पैदावार 200 से 250 क्विटल प्रति हेक्टेयर होती है।

Punjab longmelon 1- अवधि 90 से 100 दिन यह किस्म 1995 में तैयार की गई है । यह जल्दी पकने वाली किस्म है। इसकी बेलें लंबी ,हल्के हरे रंग का तना , पतला और लंबा फल होता है । इसकी औसतन पैदावार 86 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

दुर्गापुरी ककड़ी- अवधि 90 से 100 दिन दुर्गापुरी ककड़ी को राजस्थान के आसपास वाले राज्यों में अधिक उगाया जाता है, इस किस्म के फल जल्दी पककर तैयार हो जाते हैं,

जिनका उत्पादन अच्छी तरह खेती करने पर 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त किया जा सकता है |इस किस्म के फल हल्के पीले रंग के होते हैं . जिन पर नालीनुमा धारियां दिखाई देती हैं।

ककड़ी की खेती मे बीज उपचार

हाइब्रिड बीज पहले से उपचारित आते है इनकी सीधी बुवाई की जा सकती है । अगर घर पर तैयार किया हुआ या देसी बीण पा बुवाई करते है तो इसे कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम + थिरम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित कर ले।

बीज की मात्रा

ककड़ी की 1 एकड़ फसल तैयार करने के लिए 400 से 500 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है ।

बुआई का तरीका

फसल बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 1.5-2.0 मीटर तक रखना चाहिए । ध्यान दें कि एक जगह पर 2 बीज की बुवाई करें , ताकि बीज जमाव के बाद एक स्वस्थ पौधा छोड़कर दूसरा पौधा निकाल दे।

उर्वरक व खाद प्रबंधन

ककड़ी की खेती मे बुवाई का समय

ककड़ी की फसल बुवाई के समय 1 एकड़ खेत में 200 क्विंटल गोबर की खाद , 2.5 किलोग्राम ट्रिकोडेर्मा , 10 किलोग्राम कार्बोफुरान , 50 किलोग्राम पोटाश , 25 किलोग्राम यूरिया , 100 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट , 5 किलोग्राम जायम , 5 किलोग्राम सल्फर का इस्तेमाल करे।

बुवाई के 25 से 30 दिन बाद फसल बुवाई के 30 दिन बाद 10 ग्राम NPK 0:52:34 और 10 मिली Dhanzayam gold को 1 लीटर पानी के हिसाब से घोलकर पौधे पर स्प्रे करे।

सिंचाई – ककड़ी की खेती

  • ककड़ी की फसल में पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें।
  • दूसरी सिंचाई के 4 से 5 दिन बाद करे जिससे अंकुरण अच्छा हो सके।
  • पौधो की वनस्पति वृद्धि और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहे।
  • फसल में फूल आने के पहले , फूल आने के समय और फल की वृद्धि के समय भूमि में नमी कम नही होना चाहिये।
  • इससे फल के विकास में विपरीत प्रभाव पड़ता है । फसल से फलों की तुड़ाई के 2-3 दिन सिचाई करनी चाहिये जिससे फल ताजे , चमकदार और आकर्षित रहेंगे।
  • किसान भाइयों भूमि की ऊपरी सतह से 50 से.मी. तक नमी बनाये रखना चाहिये । क्योंकि इस क्षेत्र में जडे अधिक संख्या में होती है ।

फसल की कटाई

जब फल हरे और मुलायम हो , तब ही तुड़ाई का काम करें, ककड़ी की तुड़ाई किस्मो के अनुसार 35 से 40 दिन पर शुरू हो जाती है । फलो के साइज के अनुसार तुड़ाई शुरू कर दे।

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