किसान भाइयों, आज हम आपके लिए एक ऐसी प्रेरणादायक सफलता की कहानी लेकर आए हैं, जिसे सुनकर आपको यकीन हो जाएगा कि मेहनत और लगन से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। यह कहानी है महाराष्ट्र के अमरावती जिले के रहने वाले 57 वर्षीय किसान रवींद्र माणिकराव मेतकर की, जिन्होंने अपने घर की छत से 3,000 रुपये में पोल्ट्री फार्म (मुर्गी पालन) शुरू किया था और आज उनका सालाना टर्नओवर 15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इतना ही नहीं, इस किसान की कामयाबी को दुनिया भर में सराहा जा रहा है। इसी के चलते उन्हें अपनी सफलता की कहानी और अनुभव साझा करने के लिए दुनिया की मशहूर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (UK) से खास न्योता मिला है।
3,000 रुपये और 100 मुर्गियों से की थी शुरुआत
रवींद्र मेतकर ने साल 1984 में पोल्ट्री फार्मिंग की शुरुआत की थी, जब वे जूनियर कॉलेज में पढ़ते थे। उनके पिता वन विभाग में ‘क्लास IV’ के कर्मचारी थे। रवींद्र ने अपने पिता से मिले 3,000 रुपये से अपने घर की छत पर सिर्फ 100 मुर्गियों के साथ इस बिजनेस की नींव रखी थी।
बर्ड फ्लू से लगा झटका, लेकिन हार नहीं मानी
कॉमर्स में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद, रवींद्र ने बैंक से 5 लाख रुपये का लोन लिया और 4,000 मुर्गियों के साथ एक बड़ा फार्म शुरू किया। 2006 तक उनका व्यवसाय बहुत अच्छा चलने लगा और उनके पास 20,000 से ज्यादा पक्षी हो गए।
लेकिन उसी साल पूरे देश में ‘बर्ड फ्लू’ (Bird Flu) फैल गया, जिससे उनका पूरा बिजनेस ठप हो गया। भारी नुकसान के बावजूद रवींद्र ने हिम्मत नहीं हारी। साल 2008 में उन्होंने फिर से 25 लाख रुपये का लोन लिया और 20,000 पक्षियों के साथ नई शुरुआत की।
आज है 15 करोड़ का टर्नओवर (1.8 लाख मुर्गियां)
रवींद्र बताते हैं कि, “उसके बाद हमने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।” आज उनके 50 एकड़ खेत में फैले पोल्ट्री फार्म में लगभग 1.8 लाख मुर्गियां हैं और उनका सालाना टर्नओवर 15 करोड़ रुपये हो गया है। सबसे अच्छी बात यह है कि अब उन पर बैंक का कोई लोन नहीं है।
पोल्ट्री के साथ-साथ वे गेहूं, मक्का, केला, आम, संतरा, नींबू, चीकू और नारियल जैसी फसलों की प्राकृतिक खेती भी करते हैं, जिसमें ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल कर कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाया जाता है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से आया बुलावा – Farmer Success Story
रवींद्र मेतकर की इसी शानदार कामयाबी को देखते हुए उन्हें 1 से 5 मई 2026 तक यूके (UK) की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाले ‘ग्लोबल रिसर्च कॉन्फ्रेंस’ में स्पीकर के तौर पर बुलाया गया है। इस कॉन्फ्रेंस का विषय “AI for Every Mind” है।
आयोजकों ने अपने निमंत्रण पत्र में कहा है कि एक भारतीय कृषि-उद्यमी के तौर पर रवींद्र के अनुभव पूरी दुनिया के लिए बहुत मूल्यवान होंगे।
फटे कपड़ों और टूटी साइकिल से ऑक्सफोर्ड तक का सफर
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए रवींद्र मेतकर बताते हैं:
“एक समय ऐसा भी था जब मेरे पास पहनने के लिए ठीक-ठाक कपड़े नहीं थे। मैं घर के सिले हुए फटे-पुराने कपड़े पहनता था और कॉलेज जाने के लिए साइकिल तक नहीं थी। मैंने जीवन में कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जाकर अपनी कहानी सुनाने का मौका मिलेगा।”
आज वे देश के कई बड़े संस्थानों जैसे IIT भिलाई, ICAR और कई कृषि विश्वविद्यालयों (Agriculture Universities) में छात्रों और किसानों को पोल्ट्री बिजनेस और खेती की ट्रेनिंग देते हैं। उनका पूरा परिवार (भाई और बेटे) भी उनके इस 15 करोड़ के साम्राज्य को संभालने में मदद करता है।
रवींद्र मेतकर की Farmer Success Story यह कहानी देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती।
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