कपास (Cotton) उगाने वाले किसान भाइयों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बहुत अच्छी खबर आई है। 20 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में, कपास किसानों को मंडी के कम भाव से बचाने के लिए 1,718.56 करोड़ रुपये की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) सहायता को मंजूरी दी गई है।
यह फैसला किसानों के लिए क्यों जरूरी है?
अक्सर देखा गया है कि जब बाजार में कपास की आवक बढ़ती है, तो व्यापारियों द्वारा भाव गिरा दिए जाते हैं। ऐसे में किसानों को मजबूरी में अपनी फसल सस्ते में बेचनी पड़ती है। इस 1,718.56 करोड़ रुपये के फंड से भारतीय कपास निगम (CCI) किसानों से सीधे कपास खरीदेगा।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर बाजार का भाव सरकार द्वारा तय एमएसपी से नीचे जाता है, तो CCI किसानों की फसल एमएसपी पर खरीदेगा, जिससे उन्हें नुकसान नहीं होगा।
60 लाख किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
भारत में कपास एक बड़ी नकदी फसल (Cash Crop) है। देश के लगभग 60 लाख किसान सीधे तौर पर कपास की खेती पर निर्भर हैं। इसके अलावा कपड़े के कारखानों, व्यापार और प्रोसेसिंग से जुड़े लगभग 4 से 5 करोड़ लोगों का रोजगार भी कपास पर ही टिका है।
कितने बड़े हिस्से में होती है कपास की खेती?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2023-24 में देश में लगभग 114.47 लाख हेक्टेयर जमीन पर कपास बोई गई थी। इस साल लगभग 325.22 लाख गांठ कपास का उत्पादन होने का अनुमान है, जो पूरी दुनिया के कुल कपास उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत (चौथाई हिस्सा) है।
सरकार कैसे खरीदती है कपास?
- भारतीय कपास निगम (CCI): यह सरकार की मुख्य एजेंसी है जो किसानों से कपास खरीदती है।
- कोई लिमिट नहीं: जब बाजार भाव एमएसपी से नीचे गिरता है, तो CCI किसानों से फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) वाली कपास खरीदती है — वह भी बिना किसी लिमिट के। यानी किसान जितनी चाहे उतनी फसल सरकार को एमएसपी पर बेच सकता है।
- खरीद केंद्र: CCI ने देश के 11 मुख्य कपास उत्पादक राज्यों के 152 जिलों में 508 से ज्यादा खरीद केंद्र (Procurement Centers) खोले हैं, ताकि किसानों को फसल बेचने के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े।
कपास किसानों के लिए नई तकनीक
सरकार ने कपास खरीद को और ज्यादा साफ-सुथरा और आसान बनाने के लिए कुछ नए ऐप और सिस्टम भी शुरू किए हैं। अब “कॉट-अली” (Cott-Ally) मोबाइल ऐप के जरिए किसान सीधे जानकारी ले सकते हैं कि कपास की खरीद कहां हो रही है और नियम क्या हैं। इसके अलावा ‘बेल पहचान प्रणाली (BITS)’ से कपास की हर गांठ की ट्रेकिंग भी आसान हो गई है।
केंद्र सरकार का 1,718 करोड़ रुपये का यह फंड कपास किसानों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच है। अब अगर बाजार भाव गिरते हैं, तो किसान भाई परेशान न हों, अपनी अच्छी क्वालिटी की कपास (कपास फली) सीधे CCI के खरीद केंद्र पर एमएसपी रेट में बेच सकते हैं।